अमर भारती :  शारदा चिटफंड घोटाला मामले में सुप्रीम कोर्ट ने कोलकाता के पूर्व पुलिस आयुक्त राजीव कुमार से हाल ही में हुयी पूछताछ से संबंधित प्रगति जांच में सीबीआई द्वारा किये गये खुलासे को बहुत ही गंभीर करार दिया है। प्रधान न्यायाधीश रंजन गोगोई, न्यायमूर्ति दीपक गुप्ता और न्यायमूर्ति संजीव खन्ना की पीठ ने कहा कि कुछ बहुत ही गंभीर तथ्यों की जानकारी सामने आई है तो वह इसके प्रति अपनी आंखे नहीं मूंद सकते हैं।

बता दें कि अब पीठ ने इसके साथ ही जांच ब्यूरो को निर्देश दिया है कि राजीव कुमार के खिलाफ उचित राहत के लिए वह आवेदन दायर करे। पीठ ने जांच ब्यूरो को इस संबंध में आवेदन दायर करने के लिए दस दिन का वक्त दिया है और कहा कि कुमार तथा अन्य लोग इसके बाद सात दिन के भीतर अपना जवाब दाखिल कर सकते हैं। पहले राजीव कुमार ही इस चिटफंड घोटाले की जांच करने वाले विशेष जांच दल के मुखिया थे।

दरअसल सुप्रीम कोर्ट ने यह कहा कि केंद्रीय जांच ब्यूरो की रिपोर्ट सील बंद लिफाफे में दायर की गयी है, इसलिए वह दूसरे पक्ष को सुने बगैर इस समय कोई आदेश पारित नहीं कर सकती। सुप्रीम कोर्ट सारदा चिटफंड घोटाले की जांच में सहयोग नहीं करने और कथित रूप से सबूत नष्ट करने के मामले में पश्चिम बंगाल के पुलिस महानिदेशक और कोलकाता के तत्कालीन पुलिस आयुक्त सहित कई वरिष्ठ अधिकारियों के खिलाफ सीबीआई की अवमानना अर्जी पर सुनवाई कर रही थी।

जब से शारदा चिटफंड घोटाला मामला सामने आया है तभी से हर रोज यह मामला गंभीर होता जा रहा है और रोजाना इसमें एक नया नाम सामने आता जा रहा है। इस मामले का सबसे बड़ा असर केवल एक ही राज्य यानी बंगाल पर पड़ता दिख रहा है।

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