अमर भारती :  लोकसभा चुनाव की तारीखों के ऐलान के साथ ही सियासी हलचल तेज हो चुकी है। जहां बीजेपी अभी एक मजबूत पार्टी के तौर पर दिख रही है तो वहीं कांग्रेस भी जोरदार तैयारीयों में जुटी है। तारीखों के ऐलान के साथ ही कहीं गठबंधन की गांठे खुल रही हैं तो कहीं गठबंधन बन रहा है।

2014 के लोकसभा चुनाव में कांग्रेस को 44 तो वहीं बीजेपी को 282 सीटों पर जीत मिली थी। 2014 के चुनाव में मोदी के चेहरे ने बीजेपी के लिए काम कर दिखाया था। इसी के मद्देनजर बीजेपी दावा करती है कि हमने 60 दिनों में वो कर दिखाया था जो कांग्रेस 60 सालों में नहीं कर पाई थी।

बीजेपी भी 2019 के लोकसभा चुनाव में कमर कस चुकी है। उसने कई पार्टियों से हाथ मिलाना शुरू कर दिया है। तो वहीं राहुल गांधी भी गठबंधन को अपना से पीछे नहीं हठ रहे हैं। आपको बता दें कि जब भी बीजेपी या कांग्रेस ने कम लोगों को चुनावी मैदान में उतारा है। उन्हें ज्यादा सीटों पर जीत हासिल हुई है।

उदाहरण के तौर पर बीजेपी ने 2009 की अपेक्षा 2014 में कम लोगों को उतारा था, जिसके बाद क्या हुआ ये तो आप सब जानते ही है। यानि अगर गठबंधन के तहत पार्टियां कम उम्मीदवारों को उतारती हैं। तो उन्हें किसी तरह के नुकसान का सामना नहीं करना पड़ेगा इसलिए पार्टियां गठबंधन के लिए अपनी जीती हुई सीटें भी छोड़ देती हैं।

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