अमर भारती : भारत के मोस्ट वांटेंड आतंकी मसूद अज़हर को लेकर वीरवार को विश्व सुरक्षा परिषद् में फैसला आना था लेकिन चीन ने अपनी नापाक चाल की वजह से फिर एक बार आतंकवाद और आतंकियों का समर्थन करके दुनिया को अपना असली चेहरा दिखा दिया है। अमेरिका,फ्रांस रूस समेत दुनिया के सभी देशों ने मसूद अज़हर को ग्लोबल टेररिस्ट की लिस्ट में शामिल करने के लिए सुरक्षा परिषद् में प्रस्ताव लेकर आए थे लेकिन चीन ने वीटो का प्रयोग करके मसूद अज़हर को ग्लोबल टेररिस्ट की लिस्ट में शामिल होने से बचा लिया। बता दें कि विश्व सुरक्षा परिषद् में स्थाई देशों को वीटो पावर दिया जाता है ,जिसका अर्थ होता है किसी प्रस्ताव पर उस देश की नामंजूरी की स्तिथि में प्रस्ताव पारित नहीं हो सकता।

दरअसल अमेरिका, फ्रांस ,रूस समेत कई अन्य देशों ने विश्व सुरक्षा परिषद् में 27 फ़रवरी को मसूद अज़हर को वैश्विक आतंकी घोषित करने को ले कर प्रस्ताव ले कर आये थे। सुरक्षा परिषद् के देशों के पास इस प्रस्ताव पर विचार करने के लिए 10 दिन का समय था जो की गुरुवार रात 12 :30 बजे समाप्त हो जाता ,यहां गौर करने वाली बात यह है की 12 :30 बजे तक इस मुद्दे पर चीन की प्रतिक्रिया नहीं आयी थी इस प्रस्ताव को चीन के द्वारा भी स्वीकृत मान लिया जाने वाला था लेकिन चीन ने इस समय सीमा को ख़तम होने से ठीक एक घंटे पहले बयान जारी किया की वह इस मुद्दे पर विचार के लिए थोड़ा और समय चाहता है। जिसके बाद इस प्रस्ताव पर अटकलें लग गई। आपको बता दें की पिछले 10 सालों में यह चौथी बार है की चीन ने सुरक्षा परिषद् में मसूद अज़हर को वैश्विक आतंकी घोषित होने पर अटकलें लगाई है। यहाँ पर सवाल यह है की चीन हर बार मसूद अज़हर जैसे आतंकिओं की बचाने के लिए अपना हाथ क्यों बढ़ता है।

चीन को कई बार अपनी इन नीतिओं की वजह से वैश्विक विरोध का सामना भी करना पड़ता है आपको बता दें की चीन के निर्यात और आयात में फरवरी माह में अनुमान से अधिक गिरावट दर्ज की गई है। एक रिपोर्ट के मुताबिक चीन और अमेरिका के बीच व्यापार आधा हो गया  जनवरी में जहां 27.3 अरब डालर का व्यापार हुआ, वहीं फरवरी में यह 14.7 अरब डालर ही रहा।

वहीं इस कड़ी में तिब्बत का ज़िक्र करना भी जरूरी है। आपको यह जानकर आश्चर्य होगा कि तिब्बत एक स्वतंत्र देश था, सन् 1821 के चीन -तिब्बत युद्ध में तिब्बत की जीत हुई थी। तिब्बत-चीन का मुख्य शासक भी रहा है। भारत में अंग्रेजी राज के समय तिब्बत में भारतीय मुद्रा चलन में थी। वर्ष 1949 में चीन को आजादी मिली और माओ ज़ेडोंग के नेतृत्व में चीनी कम्युनिस्ट सरकार सत्ता में आ गयी थी।

माओ को लगा कि तिब्बत पर कब्ज़ा किये बिना चीन की आजादी अधूरी है तो चीन की पीपुल्स लिबरेशन आर्मी ने 7 अक्टूबर 1950 को तिब्बत पर हमला कर दिया और 19 अक्टूबर तक तिब्बत के 5000 सैनिकों ने चीनी सेना के सामने समर्पण कर दिया था और चीन-तिब्बत के बीच 17 सूत्रीय समझौता हुआ। इसमें धार्मिक, सांस्कृतिक, बोलने की अभिव्यक्ति जैसे मामले भी शामिल थे।

चीन का लक्ष्य तिब्बत को अपना उपनिवेश बनाकर वहां पर कम्युनिस्ट शासन स्थापित करना था। इसी हमले के बाद दलाई लामा ने अपनी जान की रक्षा करने के लिए 30 मार्च 1959 को असम में तेजपुर पहुंचे थे। इस बीच उनके 80 हजार अनुयायी भी भारत में शरण लेने पहुँच गए थे। कुछ समय बाद उन्होंने भारत के धर्मशाला (जिसे “लिटिल ल्हासा” भी कहा जाता है) में निर्वासित तिब्बत सरकार की स्थापना की थी।

दूसरी और चीन दक्षिण एशिया में भारत के बढ़ते प्रभावों से भी डरा हुआ है इसी वजह से चीन चाहता है भारत विश्व शक्ति बनने के बजाये  वह अपने आंतरिक मुद्दों में ही उलझ कर रह जाये।

लेकिन चीन की इस नापाक मंसूबे को अब भारत समझता है।इस बार चीन द्वारा मसूद अज़हर को वैश्विक आतंकी घोसगीत करने को लेकर पुरे देश में चीन का विरोध किया जा रहा है।  साथ ही साथ चीन के सामने को भी देश में बैन कर ने की मांग की जा रही है।

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