अमर भारती : भारत में पाकिस्तान का सबसे बड़ा आंतकी हमला जम्मू कश्मीर के पुलवामा में हुआ है, जहां आतंकी हमले में CRPF के 37 जवान शहीद हुए हो गए। शहीद जवानों में उन्नाव के रहने वाले अजीत कुमार आजाद, बहादुरपुर गावँ के रहने वाले अवधेश यादव, कानपुर के रहने वाले श्याम बाबू, बिगुलर के पद पर तैनात विजय कुमार मौर्य भी शामिल थे। जवानों के शहीद होने की खबर मिलते ही शहीदों के परिजनों के घर में मातम का महौल छा गया।

आइए आपको बताते हैं पुलवामा अटैक में शहीद हुए अवधेश यादव की कहानी, अवधेश यादव 2006 में सीआरपीएफ के ‘45 बटालियन’ में शामिल हुए थे। ये चार भाई बहनों में सबसे बड़े थे, इनकी 3 साल पहले शादी हुई थी और लगभग दो साल का एक बच्चा भी है। शहीद की मां कैंसर से पीड़ित है और उनका इलाज भी चल रहा है। अटैक के तीन दिन पहले ही छुट्टी खत्म कर के वो ड्यूटी पर वापस लौटे थे।

मुग़लसराय कोतवाली क्षेत्र के बहादुरपुर गांव के रहने वाले जवान लाल श्याम बाबू के शहीद होने की सूचना मिलते ही उनके परिजन बेसुध हो गए, जवान के घर पर मातम के बादल छा गए। उन्होंने सीआरपीएफ 2007 में जॉइन की थी, इनके दो छोटे-छोटे बच्चे हैं लड़का 4 वर्ष का है तो लड़की पांच महिने की है।

वहीं विजय कुमार मौर्य सीआरपीएफ में कांस्टेबल बिगुलर के पद पर तैनात थे। वह दो दिन पूर्व छुट्टी से वापस हेडक्वार्टर पहुंचे थे और वहां से ड्यूटी के लिए रवाना हो रहे थे।

शहीद के पिता रामायण सिंह के पास हेड क्वाटर से फोन आया था, जिसमे उनके बेटे के शहीद होने की सूचना मिली थी। इन्होंने नौ साल पहले सीआरपीएफ जॉइन की थी और इनकी शादी 2014 में हुई थी, और इनकी एक डेढ़ साल की मासूम बेटी भी है।

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