अमर भारती : सीबीआई विवाद मामले में कोर्ट के दखल के बाद भी पूर्व निदेशक आलोक वर्मा की दिक्कतें खत्म होने वाली नहीं है। दरअसल केंद्रीय सतर्कता आयोग (सीवीसी) ने आलोक वर्मा खिलाफ 6 आरोपों के मामलों में जांच शुरू कर दी है। सीवीसी द्वारा आरोप में बैंकों को करोड़ों रुपये का चूना लगाने वाले आरोपी नीरव मोदी, विजय माल्या और एयरसेल के पूर्व प्रमोटर सी शिवशंकरन के खिलाफ जारी हुए लुक आउट सर्कुलर के आंतरिक ईमेल को लीक करने जैसे आरोप भी है।

एक रिपोर्ट के मुताबिक, सीवीसी ने आलोक वर्मा के खिलाफ सरकार को नए आरोपों को लेकर सूचित किया है। बता दें कि वर्मा के खिलाफ यह शिकायतें भ्रष्टाचार निरोधी इकाई की जांच रिपोर्ट में पायी गई है। रिपोर्ट की जांचमें पाया गया है विशेष निदेशक राकेश अस्थाना द्वारा लगाए गए वर्मा पर लगे 10 आरोपों के बाद उनकी भूमिका की जांच होनी चाहिए।

सूत्रों के मुताबिक सीबीआई को 26 दिसंबर को एक पत्र लिखकर कहा गया है कि वह इन मामलों से संबंधित सभी दस्तावेज और फाइलों को मुहैया करवाए ताकि यह जांच किसी तार्किक निष्कर्ष तक पहुंच सके। जांच एजेंसी ने बदले में माल्या से जुड़े सभी दस्तावेज पेश कर दिए जबकि दूसरे अभी रुके हुए हैं। नीरव मोदी और माल्या फिलहाल फरार हैं।

पूर्व निदेशक आलोक वर्मा पर आरोप यह है कि उन्होंने नीरव मोदी के मामले में सीबीआई के कुछ आंतरिक ईमेलों के लीक होने पर आरोपी को ढूंढने की बजाय मामले को छिपाने की कोशिश की। आरोप मे बताया जा रहा है कि वर्मा ने ऐसा तब किया जब सबसे बड़े बैंक घोटाले की जांच आखिरी चरण पर थी। एजेंसी ने जून 2018 में संयुक्त निदेशक राजीव सिंह (नीरव मोदी के मामले की जांच करने वाले अधिकारी) के कमरे को लॉक कर दिया था। इसके अलावा उन्होंने सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय की कंप्यूटर इमरजेंसी रिस्पांस टीम (सीईआरटी) को बुलाया था ताकि उनके पास मौजूद डाटा को प्राप्त किया जा सके।

वर्मा पर दूसरा आरोप है कि उन्होंने शिवशंकरन के खिलाफ जारी लुकआउट सर्कुलर को कमजोर करने की कोशिश की। जांच के दौरन आईडीबीआई बैंक में 600 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी करने वाले शिवशंकरन ने को भारत से जाने की इजाजत दी गई।बताया जा रहा है कि एक अधिकारी ने शिवशंकरन से अपने दफ्तर और होटल में मुलाकात की थी। दोनों की यह मुलाकात सेवा नियमों और सीबीआई की आंतरिक प्रक्रियाओं के विपरीत थी। इस मुलाकात के बाद उसके खिलाफ जारी सर्कुलर को कमजोर कर दिया गया था।

तीसरा आरोप यह है कि माल्या के लुकआउट सर्कुलर को अक्तबूर 2015 में कमजोर करने की कोशिश की गई है। फिलहाल विजया माल्या पर आईडीबीआई बैंक के साथ 900 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी करने का आरोप है। माल्या वाले मामले में यूके की अदालत ने कुछ दिनों पहले ही उसके प्रत्यर्पण का आदेश दिया है। सर्कुलर जारी होने के एक महीने के अंदर ही सीबीआई के संयुक्त निदेशक एके शर्मा, ने आव्रजन अधिकारियों से इसे कमजोर करके ‘हिरासत’ में लेने की बजाए ‘सूचित करने’ को कर दिया। जिसके कारण विजय माल्या को देश से भागने में काफी मदद मिली।

यदि आप पत्रकारिता जगत से जुड़ना चाहते है तो, जुड़िए हमारे मीडिया इंस्टीट्यूट