अमर भारती : भारत में कई तरह की राजनैतिक पार्टियां हैं तो कई तरह की जातियां व धर्म भी हैं। यहां जाति व धर्म के नाम पर आरक्षण दिया जाता रहा है। तो बात करते है सवर्ण आरक्षण की जो लोकसभा से मंगलवार को दिनभर चली बहस के बाद 323 वोटों से पास हो गया और उसके विपक्ष में महज 3 वोट पड़े इसके साथ ही लोकसभा अनिश्चितकाल के लिए स्थगित कर दी गई।

बुधवार को इसे राज्यसभा में पेश किया जाएगा। वहीं जेटली ने बताया कि सुप्रीम कोर्ट ने 50 फीसदी की जो सीमा निर्धारित की है वह केवल सामाजिक और आर्थिक रूप से पिछड़ों के लिए है। सामान्य वर्ग के गरीबों को मुख्यधारा में लाने की दिशा में मोदी सरकार ने आजादी के बाद पहली ऐसी कोशिश की है। जो लंबे समय से इसकी मांग की जा रही थी क्या सवर्णों आरक्षण को लेकर विरोध शांत हो जाएगा?

क्या लोकसभा की तरह विपक्ष राज्यसभा में भी इस बिल को पास कराने में मोदी सरकार का साथ देगा या राज्यसभा में यह चुनौती बनकर रह जाएगा राज्यसभा में सांसदों की मौजूद संख्या 244 है। बिल पारित कराने के लिए दो तिहाई वोट (163) की जरूरी हैं। भाजपा 73 समेत राजग के 98 सांसद हैं। सूत्रों ने यह जानकारी देते हुए बताया कि विपक्षी पार्टियों ने अपने सभी सदस्यों से बुधवार को राज्यसभा में मौजूद रहने के लिए कहा है।

राज्यसभा में सरकार के पास बहुमत नहीं है। मंगलवार को लोकसभा में पेश किए गए आरक्षण विधेयक का लगभग सभी पार्टियों ने समर्थन किया, लेकिन राज्यसभा में विपक्षी पार्टियां इस पर कड़ा रुख अपना सकती हैं।सामान्य वर्ग के गरीबों को आरक्षण के तहत मुस्लिम व ईसाई समुदाय को भी फायदा होगा

क्या इस 10 फीसदी आरक्षण का लाभ लेने वाले लोग बिना आरक्षण के सफलता पाने वालों से कम योग्य नहीं होंगे? कोटा को भीख कहने वाले लोग क्या अब भी अपनी बातों पर कायम रहेंगे  अरुण जेटली के मुताबिक यह 10 प्रतिशत का कोटा भी सामान्य वर्ग के हिस्से से ही जाना है।

इस पर कुछ नेता आरोप लगाने से भी पीछे नहीं हट रहे हैं। भगवंत मान आप का आरोप चुनावों से ठीक पहले यह बिल लाना महज भाजपा का चुनावी स्टंट है। उनकी नीयत सही होती तो संसद के पहले सत्र में ही इसे लाया जाता। हम इसके समर्थन में हैं लेकिन उनकी नीयत साफ है तो इसे पारित करवाएं।

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