अमर भारती : 2019 लोकसभा चुनाव से पहले केंद्र सरकार ने एक अहम फैसला लिया है। सूत्रों के मुताबिक मोदी सरकार कैबिनेट ने आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग को सरकारी नौकरियों और शिक्षा में 10 फीसदी आरक्षण देने की मांग को मंजूरी दे दी है। अब गरीब सवर्णों को भी आरक्षण मिल पाएगा। इसके लिए सरकार संविधान संशोधन के जरिए आरक्षण के कोटे को बढ़ाएगी। कल संसद में संविधान संशोधन विधेयक को सरकार पेश कर सकती है।

इसके साथ ही आरक्षण का कोटा अब 49.5 से बढ़कर 59.5 फीसदी हो जाएगा। इसके लिए सरकार संविधान संशोधन बिल लाएगी। नए फैसले के बाद जाट, गुज्जरों, मराठों और अन्य सवर्ण जातियों को भी आरक्षण का रास्ता साफ हो जाएगा बशर्ते वो आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग में आते हों।

सरकार के इस फैसले पर सियासी बयानबाजी का दौर भी शुरू हो गया है। आरजेडी नेता तेजस्वी यादव ने कहा है कि पहले जाति आधारित जनगणना की जाए। फिर जाति के हिसाब से आरक्षण तय किया जाए। वहीं, शिवसेना सांसद अरविंद सावंत ने कहा कि बिल पेश होने पर ही इस पर हमाला फैसला सामने आ जाएगा।

कांग्रेसी नेता हरीश रावत ने भाजपा कैबिनेट के आर्थिक रूप से पिछड़े वर्ग को 10 प्रतिशत आरक्षण देने पर कहा कि, ‘बहुत देर कर दी मेहरबान आते-आते। वह भी तब जब चुनाव होने में कम ही समय बचा है। इससे कोई फर्क नहीं पड़ता है कि वह क्या जुमले देते हैं। कुछ भी इस सरकार को बचाने वाला नहीं है।’

कुछ महत्वपूर्ण बातें-

– 8 लाख रुपये से कम सालाना आय वाले लोग आरक्षण के दायरे में होंगे
-जिन लोगों के पास 1000 वर्ग फीट से ज्यादा आकार का घर होगा, वो इस आरक्षण के दायरे से बाहर होंगे।
-राजपूत, भूमिहाल, जाट, गुज्जर, बनिया को मिलेगा ईबीसी आरक्षण का लाभ।

फिलहाल मौजूदा आरक्षण के हालात 

कुल आरक्षण – 49.5% 
अनुसूचित जाति (SC)  –  15%
अनुसूचित जनजाति (ST)  –  7.5 %
अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC)  –  27 %

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