अमर भारती:  आतंकी संगठन धर्म के नाम पर लोगों को बहका कर पिछले एक अरसे से अफगानिस्तान में आतंकियों की प्रयोगशाला बना रखा है अपने दबदबे को कायम रखने के लिए यहां एक नहीं बल्कि कई आतंकी संगठन काम कर रहे हैं। इसके अलावा अपने आतंकी ट्रेनिंग सेंटर भी चला रहे हैं। वो बारूद के हमलों की ट्रेनिंग के साथ साथ मानव बम भी बनाते हैं।

अफगानिस्तान में ऐसी ही कई आतंक की फैक्ट्री तालिबान ने भी बना रखी हैं। तालिबान जेहादी बनाने की फैक्ट्री चलाता है। सुसाइड बॉम्बर तालिबान के नापाक आतंकी मंसूबों को अंजाम देते हैं, उसके जेहादी लड़ाके जो तालिबान की सबसे बड़ी ताकत हैं। ये जेहादी लड़ाके अपने आका के फरमान पर जान ले भी सकते हैं और जान दे भी सकते हैं।

इन लड़ाको को मरने-मारने के लिए और इन जेहादियों की नसों में नफरत का बारुद भरने के लिए आतंकियों को चार हिस्सों में ट्रेनिंग देकर तैयार किया जाता है।

पहली ट्रेनिंग

यह ट्रेनिंग तीन महीने की होती है। इस दौरान सोलह से इक्कीस साल की उम्र के लडकों को शारीरिक और मानसिक तौर पर तैयार किया जाता है। इस बीच लड़ाकों को शादी करने की इजाजत नहीं होती है। इस ट्रेनिंग के लिये ये भी जरूरी है कि चुने गये लड़ाकों को किसी भी तरह की बीमारी ना हो उन्हें पढ़ना लिखना आता हो और वो जिहाद के लिये पूरी तरह तैयार हों।

दूसरी  ट्रेनिंग

ये ट्रेनिंग छह महीने तक चलती है इस दौरान जेहाद के लिये समर्पित लड़ाकों को हथियार चलाना सिखाया जाता है इस ट्रेनिंग से पहले सभी लड़ाकों को अपने हाथों से वसीयतनामा तैयार कर अपने कमांडर को देना होता है। जिसमें वो अपनी जिंदगी जिहाद के नाम कर देते हैं।

तीसरा  ट्रेनिंग

ये ट्रेनिंग तीन महीने तक चलती है। इसमें आतंकियों को खासतौर पर बम बनाने की ट्रेनिंग दी जाती है। ट्रेनिंग के इसी हिस्से में आतंकियों को भारी हथियार चलाने का प्रशिक्षण भी दिया जाता है। उन्हें कई तरह के घातक छोटे और बड़े बम बनाने की ट्रेनिंग दी जाती है।

चौथा  ट्रेनिंग

ये प्रशिक्षण एक हफ्ते से लेकर दस दिन तक चलता है इस दौरान लड़ाकों को हाथ से चलाने वाले छोटे हथियारों, जैसे पिस्तौल और चाकू चलाने की खास ट्रेनिंग दी जाती है।

ऐसे बनाए जाते हैं मानव बम

इन आतंकियों को किसी भी वक्त जान देने के लिए तैयार किया जाता है उनके अंदर नफरत का जहर कूट कूट कर भर दिया जाता है। मानव बम, जेहादियों का सबसे खतरनाक हथियार माना जाता है। जिसमें खुद तो उनकी जान जाती ही है। साथ ही वो, अपने साथ कई सारी जानों को भी ले जाते हैं। जहां से वो आतंक की शुरूआत करते हैं। अपने मंसूबे में कामयाब होने के लिए वो दुनियां में जगह जगह आतंकी घटनाओं को अंजाम देते हैं।

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