अमर भारती : केंद्र सरकार पर राफेल डील को लेकर कांग्रेस पार्टी लगातार जवाब के लिए कहती नजर आई और वहीं चुनावी मैदानों में भी यह एक मुद्दा बना हुआ था। शुक्रवार को लोकसभा में राफेल डील पर सत्ता और विपक्ष के बीच सवाल-जवाब का सिलसिला जारी रहा।

जहां कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने सरकार से राफेल डील पर कुछ सवालों का जवाब देने के लिए कहा, वहीं रक्षा मंत्री निर्मला सीतारमण ने ज्यादातर सवालों का जवाब देते हुए कई ऐसे सवाल उठाए जिससे कांग्रेस को असहज होते देखा गया। कांग्रेस पर पलटवार करते हुए रक्षा मंत्री ने कहा कि कांग्रेस झूठा प्रचार कर रही है और उसने देश की सुरक्षा से खिलवाड़ किया है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ झूठा प्रचार किया गया जबकि पिछले चार साल के दौरान उन्होंने साफ सुथरी सरकार चलाई है और उन्होंने करीब 2 घंटे तक सदन में अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि कांग्रेस को राफेल डील पर आरोप लगाने से पहले ठीक तरह से होमवर्क करना चाहिए। इस दौरान उन्होंने कहा, मुझे यह कहते हुए घृणा हो रही है की मैं बोफोर्स की तुलना नहीं करना चाहती हूं। बोफोर्स एक घोटाला था।

जबकि राफेल विमान रक्षा जरूरत से जुड़ा है। बोफोर्स ने कांग्रेस सरकार को गिराया, राफेल मोदी को वापस लाएगा। उन्होंने कहा कि यह मुद्दा नरेंद्र मोदी को नए भारत के निर्माण के लिए, भ्रष्टाचार समाप्त करने के लिए वापस लाएगा। रक्षा मंत्री ने कहा कि 2001 के बाद भारत के पड़ोसी देश चीन और पाकिस्तान में वायुसेना को मजबूत करने की कवायद जोरों में चल रही थी।

इसके चलते 2002 में यह फैसला हुआ कि भारत को भी चीन और पाकिस्तान का मुकाबला करने के लिए जल्द से जल्द वायुसेना की जरूरतों को पूरा करना चाहिए। लेकिन इसके बाद 2014 तक केन्द्र में आसीन रही यूपीए की कांग्रेस सरकार ने लड़ाकू विमान खरीद की ऐसी प्रक्रिया शुरू की जो उनके कार्यकाल में पूरी नहीं हुई।

नतीजा यह रहा कि 10 साल के कार्यकाल के बाद भी ऐसे संवेदनशील मामले में भी कांग्रेस सरकार लड़ाकू विमान खरीदने का फैसला नहीं कर सकी. रक्षा मंत्री ने सवाल किया कि आखिर क्या वजह थी कि इस 10 साल के कार्यकाल के दौरान कांग्रेस की मनमोहन सिंह सरकार वायुसेना की जरूरत के मुताबिक लड़ाकू विमान नहीं खरीद पाई?

निर्मला सीतारमण ने राफेल मामले में कांग्रेस के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि सरकार में रहते हुए कांग्रेस की मंशा विमान की खरीदने की नहीं थी, जबकि राष्ट्रीय सुरक्षा को जोखिम था। मेरा आरोप है कि उनका इरादा विमान खरीदने का इरादा नहीं था। राष्ट्रीय सुरक्षा को जोखिम था, लेकिन वे विमान नहीं खरीदना चाहते थे।

उन्होंने कहा कि चीन ने 2004 से 2014 के दौरान 400 विमान अपने बेड़े में शामिल किए। वहीं पाकिस्तान ने अपने विमानों की संख्या में दो गुने की बढ़ोतरी की है। उन्होंने कहा कि हमारे पास 42 स्क्वाड्रन थे जो घटकर 33 रह गये। यह चिंता का विषय है।

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