अमर भारती : संसद शीत सत्र में भी राफेल सौदे पर कांग्रेस पार्टी और मोदी सरकार के बीच सियासी जंग की शरू हो गई है। राफेल मामले पर मोदी सरकार को सुप्रीम कोर्ट की क्लीन चिट के बाद बुधवार को बिना मतदान वाले नियम 1993 के तहत इस पर चर्चा होने कि संभवाना है। सोमवार को स्पीकर सुमित्रा महाजन के साथ हुई बैठक में सरकार और कांग्रेस दोनों बुधवार को चर्चा कराने पर सैद्घांतिक तौर पर तैयार थी।

हालांकि अंतिम फैसला बुधवार को कार्यवाही शुरू होने के बाद होगी। वहीं राज्यसभा में राजनीतिक गतिरोध की वजह से तीन तलाक बिल अटकने के बाद बुधवार को फिर तीन तलाक बिल राज्यसभा में पेश होगा। मुस्लिमों में तीन तलाक प्रथा को अपराध की श्रेणी में लाने वाला ये बिल राज्यसभा में बहुमत न होने के वजह से आगे नहीं बढ़ पाया था। विपक्ष इस बिल में बड़े बदलाव चाहता है।

साथ ही सदन में चर्चा से पहले प्रवर समिति की मांग पर डटा हुआ है। वहीं सरकार ये मांग मानने के लिए तैयार नहीं है। हालांकि विपक्ष के विरोध के बावजूद ये बिल लोकसभा में पास हो चुका है। यहां सरकार को बिल पास कराने में कोई मुश्किल नहीं आई लेकिन राज्यसभा में संख्या बल की कमी के कारण मुश्किलों का सामना करना पड़ा रहा है।

विपक्ष का बिल को प्रवर समिति के पास भेजने का प्रस्ताव


राज्यसभा में विपक्षी कांग्रेसी नेता गुलाम नबी आजाद ने तीन तलाक विधेयक को प्रवर समिति के पास भेजने का प्रस्ताव पेश किया है। गुलाम नबी आजाद के इस प्रस्ताव पर उच्च सदन में बुधवार को उस समय चर्चा होने की संभावना है जब मुस्लिम महिला (विवाह अधिकार संरक्षण) विधेयक 2018 विचार के लिए लाया जाएगा।
 गुलाम नबीं ने अपने प्रस्ताव में प्रवर समिति के लिए 11 विपक्षी सदस्यों के नाम भी प्रस्तावित किए हैं। आजाद द्वारा प्रस्तावित सदस्यों में कांग्रेस के आनंद शर्मा, सपा के राम गोपाल यादव, आम आदमी पार्टी के संजय सिंह, राजद के मनोज कुमार झा भी शामिल हैं।

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