अमर भारती : उत्तरप्रदेश के गाजीपुर में आरक्षण की मांग कर रही भीड़ ने शनिवार शाम एक पुलिस वाहन पर पथराव कर दिया। जिसमें एक सिपाही की मौत हो गई। यह हादसा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की रैली के कुछ घंटों बाद हुआ। मामले में 32 लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है। इस महीने राज्य में यह दूसरा मामला है, जब भीड़ के हमले में पुलिसकर्मी की मौत हुई है। इससे पहले 3 दिसंबर को बुलंदशहर में गोहत्या के विरोध में प्रदर्शन कर रहे लोगों ने इंस्पेक्टर सुबोध सिंह की गोली मारकर हत्या कर दी थी।

गाजीपुर के ननोहारा पुलिस थाने में कई लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है। अब तक इस मामले में 9 लोगों की गिरफ्तारी हुई है। जबकि कुछ लोगों को हिरासत में लेकर पूछताछ की जा रही है। मृतक कॉन्स्टेबल के परिजन प्रतापगढ़ से गाजीपुर पहुंच गए हैं। 8 बजे मृतक कॉन्स्टेबल के शव का पोस्टपार्टम किया जाना है। जिले के आला पुलिस अधिकारी दिन में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर घटना का पूरा ब्योरा देंगे। अब तक 32 लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है जिनमें ज्यादातर निषाद पार्टी के कार्यकर्ता हैं।

सीओ सिटी गाजीपुर एमपी पाठक ने बताया कि भीड़ के पथराव में मारे गए सिपाही के मामले में 92 लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया है। इसमें 32 नामजद और 60 अज्ञात हैं। इसमें से 11 को पुलिस ने गिरफ्तार किया है। कुछ लोगों को हिरासत में लेकर  पूछताछ की जा रही है। पुलिस वीडियो क्लीपिंग से भी आरोपियों की पहचान करने का प्रयास कर रही है।

इस घटना में मारे गए सुरेश वत्स की पत्नी के लिए सीएम योगी आदित्यनाथ ने 40 लाख के मुआवजे का ऐलान किया है। वहीं पत्नी को असाधारण पेंशन और माता-पिता को सरकार 10 लाख रुपये देगी। सीएम योगी ने परिवार के सदस्य को सरकारी नौकरी का भी ऐलान किया है। इसके अलावा सीएम योगी ने डीएम और एसएसपी को असामाजिक तत्वों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने और तुरंत गिरफ्तारी का निर्देश दिये है।

निषाद पार्टी के छत्रपति निषाद ने कहा कि हम निषाद समाज के लिए आरक्षण की मांग कर रहे हैं और हम इसका संदेश लोगों के बीच फैला रहे हैं। हम प्रयागराज से मार्च शुरू कर रहे हैं जो पूरे राज्य में चलेगा. 4 साल हो गए हैं, पीएम और सीएम दोनों ने निषादों की मांग पूरी नहीं की।

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