अमर भारती : तीन तलाक विधेयक को पारित कराने के लिए लोकसभा में गुरुवार को जोरदार बहस हुई। पर आखिरकार.‘मुस्लिम महिला विवाह अधिकार संरक्षण विधेयक-2018’ लोकसभा में पास हो गया। कांग्रेस समेत पूरा विपक्ष कमजोर विधेयक होने की दलील देकर सेलेक्ट कमेटी में भेजने की मांग पर अड़ा रहा।

वहीं अब सरकार की कोशिश है कि यह बिल राज्यसभा में भी जल्द से जल्द पास हो जाए भाजपा का पूरा जोर इस बात पर रहा कि बिल के बहाने कांग्रेस को महिला विरोधी साबित किया जा सके, यही कारण रहा कि सरकार के तमाम बड़े मंत्री रविशंकर प्रसाद, अरुण जेटली और स्मृति ईरानी कांग्रेस पर महिला विरोधी होने का कटाक्ष करते दिखे। तीन तलाक विधेयक के पक्ष में 245 और 11 वोट  विपक्ष में पड़े।

खबरों के मुताबिक तीन तलाक में वोटिंग पर ओवैसी का प्रस्ताव गिरा। ओवैसी की तरफ से लाए गए प्रस्ताव को सदन से मंजूरी नहीं मिली। वोटिंग में ओवैसी के प्रस्ताव के समर्थन में 15 वोट पड़े। यह शीतकालीन सत्र काफी अहम है क्योंकि मोदी सरकार के लिए यह आखिरी सत्र है। ऐसे में लोकसभा से पारित होने के बाद सरकार की कोशिश है कि इस सत्र में तीन तलाक बिल को राज्यसभा में पारित कराया जाए।

लेकिन उच्च सदन के हालात और सरकार के आंकड़े इस काम में बाधा बन सकते हैं। पिछले साल भी तीन तलाक बिल लोकसभा से पारित हो गया था और फिर राज्यसभा ने बिल में कुछ संशोधन की मांग के साथ इसे वापस कर दिया था। सरकार इसके लिए अध्यादेश भी लेकर आई थी। वहीं कानून मंत्री ने कहा कि यह विधेयक महिलाओं को उनके अधिकार और न्याय दिलाने के लिए है। न कि किसी धर्म, समुदाय या विचार विशेष के खिलाफ।

दुनिया में 20 इस्लामिक देशों ने तीन तलाक पर प्रतिबंध लगा दिया है। तो हम ऐसा क्यों नहीं कर सकते। अब राज्यसभा के ठप पड़े कामकाज की वजह से मोदी सरकार की मुश्किलें और बढ़ती दिख रही हैं। शुक्रवार को भी आंध्र प्रदेश को विशेष राज्य का दर्जा देने की मांग, तमिलनाडु में कावेरी बांध के निर्माण सहित विभिन्न मुद्दों पर विपक्षी दलों ने राज्यसभा में हंगामा किया, जिसके बाद सदन की कार्यवाही को शुरू होने के 10 मिनट बाद ही सोमवार तक के लिए स्थगित कर दिया गया है। वहीं विपक्ष  तीन तलाक देने पर दंड के तौर पर तीन साल की सजा के प्रावधान के लिए केंद्र सरकार को घेरता दिख रहा है।

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