केंद्र सरकार ने देशभर में इस्तेमाल हो रहे तमाम कंप्यूटरों की जानकारी को लेकर बड़ा आदेश जारी किया है। सरकार के इस आदेश के बाद अब आपके कंप्यूटर की जानकारी को हासिल किया जा सकता है। इसके लिए केंद्रीय गृह मंत्रालय ने 10 केंद्रीय एजेंसियों को देशभर में चल रहे कंप्यूटर में सेंधमारी की इजाजत दे दी है। सरकार के इस आदेश के बाद किसी भी कंप्यूटर से जेनरेट, रिसीव, सेव और ट्रांसमिट किए गए दस्तावेज को देखा जा सकता है।

गृह मंत्रालय के आदेश के अनुसार आईबी, नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो, प्रवर्तन निदेशालय, सेंट्रल बोर्ड ऑफ डायरेक्ट टैक्स, डायरेक्टरेट ऑफ रेवेन्यू इंटेलिजेंस, सीबीआई, एनआईए, कैबिनेट सेक्रेटेरिएट, डायरेक्टरेट ऑफ सिग्नल इंटेलिजेंस और दिल्ली के कमिश्नर ऑफ पुलिस को इस बात की इजाजत दी गई है कि वह लोगों के कंप्यूटर की जासूसी कर सकते हैं और कंप्यूटर की जानकारी हासिल कर सकते हैं। सरकार के इस फैसले के बाद अब देशभर में किसी के भी कंप्यूटर के भीतर सरकार की एजेंसियां जासूसी कर सकती हैं।

ऐसा कर सरकार ने महज एक सामान्य से सरकारी आदेश के जरिए जिसके खिलाफ वह चाहे उसकी जासूसी का आदेश दे दिया है। यह संविधान प्रदत्त निजता के मौलिक अधिकार का अतिक्रमण और अपमान करता है। उच्चतम न्यायालय कई बार निजता के अधिकार की व्याख्या कर चुका है।

ऐसा प्रतीत होता है कि सरकार राष्ट्रीय सुरक्षा के नाम पर न संविधान, न उच्चतम न्यायालय के आदेशो-निर्देशों और जनता के मौलिक अधिकारों का सम्मान करना चाहती है। हांलांकि सरकार ने यह आश्वस्त करने की कोशिश की है कि केन्द्रीय गृह मंत्रालय के अधीन काम करने वाली जांच ऐजेंसियां केवल राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े मामलों में ही कम्प्यूटर या फोन की जांच करेंगीं।

लेकिन सवाल उठता है कि राजनीतिक असहिष्णुता और शत्रुता के इस माहौल में इस बात की क्या गारंटी है कि इस अधिकार का बेजा इस्तेमाल नहीं होगा ?  सरकार का कहना है कि यह कदम उठाने के लिए केन्द्रीय गृह सचिव की अनुमति जरूरी होगी। लेकिन केन्द्रीय गृह सचिव अपने राजनीतिक बॉसों के अधिकारों की अवज्ञा क्या आसानी से कर पाएंगे?

राष्ट्रीय सुरक्षा को ज्यादा खतरा तो देश के दुश्मन देशों से है जो तकनीक का इस्तेमाल कर सरकारी नेटवर्क में सेंधमारी करते हैं और राष्ट्रीय महत्व की सूचनाएं हैक या प्राप्त कर लेते हैं। हाल के वर्षों में सैंडवॉर्म नाम का एक मालवेयर प्रकाश में आया था जिसने विभिन्न सरकारी नेटवर्क में सेंधमारी की। सरकार ऐसी तकनीकों के बारे में कितनी सजग है और वह इनसे बचने के लिए क्या कर रही है, यह आम आदमी नहीं जानता।

सरकार ने ऐसा कोई उदाहरण भी नहीं दिया है कि इस अधिकार के न होने से वह राष्ट्रीय सुरक्षा के किसी खास मामले में उसे खासी दिक्कत का सामना करना पड़ा। सरकार को अपने इस आदेश के खिलाफ विपक्ष के विरोध को झेलना पड़ेगा। निजता के अधिकार का सम्मान करते हुए सरकार को इस मुद्दे पर पुनर्विचार करना चाहिए और किसी भी सूरत में इसे प्रतिष्ठा का विषय नहीं बनाना चाहिए।

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anilg@amarbharti.com

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