अमर भारती : जम्मू-कश्मीर के पुलवामा में शनिवार सुबह सुरक्षाबलों को 2 से 3 आतंकियों के छिपे होने की खबर मिली तो सेना फौरन हरकत में आ गई। सुरक्षाबलों ने ऑपरेशन शुरू किया और घंटों चली मुठभेड़ के बाद हिज्बुल के प्रमुख कमांडर जहूर अहमद ठोकर को दो अन्य आतंकियों के साथ मार गिराया गया। आतंकी ठोकर पुलवामा जिले का ही रहने वाला था और पिछले साल जुलाई में 173 टेरिटोरियल आर्मी से हथियार लेकर हिज्बुल मुजाहिदीन में शामिल हुआ था।

जम्मू-कश्मीर में वर्ष 2018 के दौरान आतंकियों के खिलाफ सुरक्षाबलों का अभियान काफी तेजी से चल रहा है। अनुमान है कि इस साल 250 से ज्यादा आतंकियों को मुठभेड़ के दौरान मार गिराया गया है। इनमें से 132 स्थानीय आतंकी बताए जा रहे हैं। वहीं आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा के तकरीबन 80 आतंकियों को एक साल के दौरान अलग-अलग मुठभेड़ों में ढेर कर दिया गया।

बताया जा रहा है कि राष्ट्रीय राइफल्स के जवान औरंगजेब की हत्या में आतंकी जहूर नाम का नाम सामने आया था। ऐसे में इसे सुरक्षाबलों के लिए बड़ी सफलता के रूप में देखा जा रहा है। मुठभेड़ के दौरान एक जवान भी शहीद हो गया। वहीं पुलवामा में एनकाउंटर के बीच सुरक्षाबलों के साथ स्थानीय लोगों की झड़प भी हो गई।

खबरों के मुताबिक हालात पर काबू पाने के लिए सुरक्षाबलों ने फायरिंग की। इस दौरान गोली लगने से दो स्थानीय नागरिकों की भी मौत हो गई। जबकि दर्जन भर से ज्यादा प्रदर्शनकारी घायल हो गए है। पुलवामा जिले में प्रशासन ने इंटरनेट सेवाएं बंद कर दी है और कुछ इलाकों में आवाजाही पर रोक भी लगा दी गई है।

पिछले डेढ़ साल से जम्मू कश्मीर में सक्रिय होकर आतंकी ठोकर ने कई आतंकी वारदातों को अंजाम दिया था, जिसमें करीब 4 सुरक्षाकर्मियों की जान गई थी। सुरक्षा एजेंसियों के मुताबिक, पिछले डेढ़ साल के दौरान जहूर ठोकर तीन बार अलग-अलग मुठभेड़ों में बचकर निकलने में कामयाब रहा था।

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