अमर भारती : 7 दिसंबर का दिन अमेरीका के लिए बेहद खास और ना भूलने वाला दिन है। 75 साल पहले दूसरे विश्व युद्ध के दौरान साल 1941 में अमरीकी नौसैनिक अड्डे पर्ल हार्बर पर जापान ने लड़ाकू विमानों से हमला कर अमेरिका के आसमान को काले धुंऐ से भर दिया था। दूसरे विश्व युद्ध में अमरीकी ज़मीन पर यह पहला हमला था। इस हमले ने अमेरीका को जबरदस्‍त झटका दिया था।

जापान ने एक घंटे और 15 मिनट तक पर्ल हार्बर पर बमबारी कर  अमेरिका के लगभग 3000 हवाई जहाज और 8 विशालकाय लड़ाकू समुद्री जहाज बर्बाद कर दिए थे। जापान के इस हमले में 2400 से ज्यादा अमरीकी जवान मारे गए थे। जापाम के द्वारा हुए इस हमले में सौ से ज्यादा जापानी सैनिक भी मारे गए थे। अचानक हुए इस हमले के लिए अमेरीका बिल्कुल त्यार नहीं था।

यह हमला अमेरिका के लिए बेहद चौंकाने वाला इसलिए भी था क्योंकि हमले से ठीक एक दिन पहले ही वाशिंगटन में जापानी प्रतिनिधियों की अमेरिकी विदेश मंत्री कॉर्डेल हल के साथ जापान पर लगे आर्थिक प्रतिबंधों को समाप्‍त करने को लेकर सुलह की बातचीत चल रही थी। अमेरीका पर इस बड़े हमले के पीछे जापान की एक नाराजगी थी। जापान अमेरिकी प्रतिबंध और चीन को दी गई मित्र सेनाओं की मदद से अमेरीका से नाराज था। जिस वजह से जापान ने अमेरिका खिलाफ युद्ध की घोषणा कर दी थी।

पर्ल हार्बर पर किए गए हमले की जापान को बड़ी भारी कीमत चुकानी पड़ी थी। अमेरीका एक माहाशक्ती देश था। वह जापान के इस हमले के बाद तिलमिला गया था। जापान ने अमेरिका पर हमला कर उसे दुसरे विश्वयुद्ध में आने की चुनौति दे दी थी। पर्ल हार्बर हमले के 4 वर्ष बाद अमेरीका ने जापान के हिरोशिमा और नागासाकी पर परमाणु हमले कर दिए। परमाणु हमला इतना जबर्दस्त था कि जापान आज तर इस हमले से उभर नहीं पाया है। जापान पर्ल हार्बर पर हमले को अपनी सबसे बड़ी गलती मानता है।

पर्ल हार्बर को अमेरिका ने हमले के एक वर्ष बाद ही फिर से तैयार कर लिया था। एक वर्ष बाद ही यह बंदरगाह अमेरिका के प्रशांत महासगरीय बेड़े का हैडक्वा र्टर बन गया। लेकिन जापान को अपने दोनों शहर बसाने में वर्षों लग गए। और आज तक जापान अमेरीका के इस परमाणु हमले से उभर नहीं पाया है।

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