अमर भारती: बीजेपी के ऊपर मुसीबते थमने का नाम ही नही ले रही हैं, राजस्थान में 5 बार के विधायक रहे और मंत्री सुरेश गोयल के बाद अब यूपी के बहराइन से सांसद और दलित नेता सावित्री बाई फुले ने इस्तीफा दे दिया है।

राजस्थान और तेलंगाना विधानसभा चुनाव की वोटिंग से महज़ एक दिन पहले उत्तर प्रदेश के बहराइच से बीजेपी सांसद और दलित नेता सावित्री बाई फुले ने पार्टी से इस्तीफा दे दिया है। सावित्री बाई फुले बीते काफी दिनों से पार्टी से नाराज़ चल रही थी और पार्टी लाइन से हटकर बयानबाजी कर रही थी, लेकिन उन्होंने अचानक पार्टी छोड़ने का एलान किया।

फुले ने इस्तीफा देने के साथ ही बीजेपी पर एक बार फिर हमला बोला है। उन्होंने आरोप लगाया कि बीजेपी समाज में बंटवारे की साजिश कर रही है। फुले की पहचान उत्तर प्रदेश में बीजेपी के एक बड़े दलित चेहरे के तौर पर रही है। हालांकि वह केंद्र और यूपी सरकार पर अक्सर निशाना साधती रही हैं और आज इस्तीफा देने के बाद भी उन्होंने पार्टी पर आरोप लगाए.

इससे पहले मंगलवार को फुले ने कहा था कि हनुमानजी दलित और मनुवादियों के गुलाम थे. उन्होंने कहा कि अगर लोग कहते है कि भगवान राम है और उनका बेड़ा पार कराने का काम हनुमानजी ने किया था, उनमें अगर शक्ति थी तो जिन लोगों ने उनका बेड़ा पार कराने का काम किया, उन्हें बंदर क्यों बना दिया? फुले का यह बयान योगी आदित्यनाथ द्धारा हनुमान जी को दलित बताने के बाद आया था।

बीते दिनों योगी आदित्यनाथ ने राजस्थान के अलवर में एक चुनावी रैली को संबोधित करते हुए हनुमान को दलित और वनवासी बताया था। जिसके बाद से इस विवाद ने तूल पकड़ लिया। उन्होंने कहा कि देश को मंदिर की जरूरत नहीं है, क्या मंदिर बेरोजगारी, दलित और पिछड़ों की समस्याओं को दूर कर सकता है। फुले ने कहा कि मंदिर से सिर्फ ब्राह्मणों को फायदा होगा, जिनकी आबादी सिर्फ तीन फीसद है। मंदिर में जो पैसा चढ़ता है उसी का इस्तेमाल कर ब्राह्मण हमारे दलित समुदाय को अपना गुलाम बनाते हैं।

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