अमर भारती : बुलंदशहर में गौहत्या के खिलाफ हुई हिंसा में लोगों ने कानून तोड़ने की सभी हदें पार कर दी। लोगों का गुस्सा इतना चरम पर था की उपद्रवियों ने पुलिस चौकी फूंक दी और दर्जनों वाहनों को आग के हवाले कर दिया। भड़की हिंसा में कोतवाल सुबोध कुमार सिंह और एक आम नागरिक की मौत हो गई। शहीद हुए इंस्‍पेक्‍टर सुबोध कुमार का शव जब जिला अस्‍पताल स्थित पोस्‍टमॉर्टम हाउस लाया गया तो शव के आने की खबर सुनकर उनकी पत्‍नी रजनी भी पहुंच गईं।

शव देखकर रजनी गहरे सदमें में चली गई। और कहने लगी मैं उनको छुऊंगी बस और वह ठीक हो जाएंगे। रजनी ने अपने पति के शव को देखकर कहा “मैं हाथ जोड़ती हूं, बस एक मिनट के लिए जाने दो। मैं उनको छुऊंगी बस और वह ठीक हो जाएंगे। बेशक मुझे कुछ भी हो जाएगा, लेकिन वह ठीक हो जाते हैं। मेरा विश्‍वास मानो” सुबोध कुमार सिंह की पत्‍नी रजनी सोमवार रात बेसुध हालत में जिला अस्‍पताल में लगातार बस यही दोहरा रही थीं।

शव को देखने परिवार वाले और रिश्तेदार भी वहां पहुंच गए थे। रजनी की यह हाल देख सबकी आंखें नम हो गईं थी। शहीद इंस्‍पेक्‍टर सुबोध कुमार दो भाइयों में सबसे छोटे थे। सुबोध कुमार के पिता राम प्रताप भी पुलिस में थे और उनकी मौत के बाद उन्‍हीं की जगह पर सुबोध कुमार को नौकरी मिली थी।

शहीद सुबोध कुमार की मौत के बाद उनके बेटे ने कहा, ‘मेरे पिता मुझे एक अच्‍छा नागरिक बनाना चाहते थे। जो धर्म के नाम पर समाज में हिंसा को नहीं भड़काएगा। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सोमवार को बुलन्दशहर में हुई हिंसा पर दुख व्यक्त किया और इस घटना में शहीद हुए पुलिस इंस्पेक्टर के परिजन को कुल 50 लाख रूपये की सहायता का ऐलान किया।

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