अमर भारती:  सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को बिहार के मुज्जफरपुर के 16 आश्रम गृहो में किशोर लड़कियों से जुडे शारीरिक और यौन उत्पीड़न मामलें की जांच का जिम्मा जांच ब्यूरों को सौंप दिया हें । वही सुप्रीम कोर्ट की मुख्य न्यायाधीश की पीठ ने बिहार सरकार की इस मामलें की जांच को जांच ब्यूरो को नही सौंपने की याचिका को भी खारिज कर दिया ।

बतां दे कि फिलहाल अभी इस मामलें की जांच बिहार पुलिस कर रही । जिसमें कई अनियमिता के साथ साथ पुलिस के रूख पर चिंता जाहिर की गई है।

टाटा इंस्ट्यिूट ऑफ सोशल साइंस ने बिहार में सभी बालिका गृह की जांच कर अपनी रिपोर्ट में सभी 16 आश्रम गृह मे बालिकाओं की स्थिति काफी चिंता व्यक्त की थी । और इसी बीच सीबीआई ने पीठ को बताया कि वह इस मामलें की जांच करने के लिए पूरी तरह से तैयार है।

 

हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने कुछ दिन पहलें ही प्रदेश सरकार की इस मामलें में उदासीनता वाले रूख को लेकर फटकार लगाई थी । चुंकि अभी तक बिहार पुलिस इस मामलें से जुड़े अपनी एक मंत्री को ढुंढ पाने में पूरी तरह से असर्मथ रही है। जिस पर पुलिस विभाग को उच्चतम न्यायालय द्वारा फटकार पहले ही लगाई जा चुकी हैं  ।

इससे पहलें भी सुप्रीम कोर्ट ने पुलिस की ओर से दाखिल की गई एफआईआर में साधारण सी धाराएं लगाये जाने पर सरकार और प्रषासन को आड़े हाथ लिया है। और साथ ही एफआरआई का और सख्त करने के साथ साथ पॉस्को एक्ट और धारा 377 के तहत मामला दर्ज करने के आदेश भी जारी किये जा चुकें है।

वहीं दूसरी ओर उच्चतम न्यायालय ने प्रदेश सरकार से पूछा है कि क्या यौन उत्पीड़न का शिकार हुई लड़कियां आप की नज़र में लड़किया नही है और उनको सुरक्षा और गरीमापुर्वक जीवन यापन का माहौल तैयार करना भी प्रदेश सरकार का उतरदायित्व होता है।

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