अमर भारती : जम्मू-कश्मीर में नए सिरे से सरकार बनने की संभावना अचानक खत्‍म हो गई है। पीडीपी की अगुवाई में बुधवार को कुछ पार्टियों ने सरकार बनाने का न्योता भेजा तो राज्यपाल सत्यपाल मलिक ने कुछ ही मिनटों बाद राज्य की विधानसभा ही भंग कर दी। राज्यपाल के इस फैसले की कई पार्टियां आलोचना कर रही हैं।

पीडीपी की मुखिया महबूबा मुफ्ती ने राज्यपाल को भेजी चिट्ठी में कांग्रेस और नेशनल कॉन्फ्रेंस के समर्थन की बात कही। उन्होंने कहा कि उनके साथ 56 विधायक हैं। महबूबा के दावे के 15 मिनट बाद ही पीपुल्स कॉन्फ्रेंस के लीडर सज्जाद लोन ने भी राज्यपाल को चिट्ठी भेजने की बात कही। सज्जाद ने कहा कि भाजपा के सभी विधायकों के अलावा 18 से ज्यादा अन्य विधायकों का समर्थन हमारे साथ है। ये संख्या बहुमत से ज्यादा है।

इस दौरान खबर आई कि राज्यपाल केंद्रीय गृह मंत्री राजनाथ से मिलने दिल्ली रवाना हो गए। रात होते होते विधानसभा भंग होने का आदेश जारी कर दिया गया। सरकार बनाने की कवायद से पैदा हुए नए राजनीतिक समीकरणों के बीच पीपुल्स कांफ्रेंस के चेयरमैन सज्जाद गनी लोन अपना लंदन दौरा बीच में ही छोड़ दिल्ली पहुंच गए।

बुधवार देर शाम लोन ने भी राज्यपाल को पत्र लिखकर भाजपा के समर्थन से सरकार बनाने का दावा पेश किया। मंगलवार से पीडीपी में बगावत की खबरों के बीच सियासी घटनाक्रम तेजी से बदला और तीनों दलों के एकसाथ आने की अटकलें शुरू हो गई।

राजभवन ने बुधवार देर रात राज्यपाल की तरफ से एक बयान जारी कर कहा कि जम्मू-कश्मीर में स्थिरता व सुरक्षा का माहौल बनाने और स्पष्ट बहुमत वाली सरकार के गठन के लिए उचित समय पर चुनाव कराने के इरादे से ही मौजूदा विधानसभा को भंग किया गया है। परस्पर विरोधी विचारधारा के राजनीतिक दलों द्वारा आपस में मिलकर एक स्थिर सरकार देना असंभव नजर आया।

पिछले अनुभव के आधार पर पाया गया कि ये दल एक काम करने वाली सरकार बनाने से कहीं ज्यादा सत्ता प्राप्त करने के लिए आपस में जुड़ रहे हैं। इसके साथ ही परस्पर विरोधी विचारधारा वाले दलों द्वारा आपस में मिलकर सरकार बनाने के लिए बड़े पैमाने पर विधायकों की खरीद-फरोख्त और पैसे के लेनदेन की खबरें भी चल रही थीं।

ये गतिविधियां लोकतंत्र के लिए जहां घातक हैं, वहीं राजनीतिक माहौल को भी बिगाड़ती हैं। ऐसे हालात में जहां विभिन्न दल बहुमत का दावा कर रहे हों, लंबे समय तक एक स्थिर सरकार के बने रहने पर हमेशा संशय रहता है।

गौरतलब है कि बुधवार शाम को महबूबा मुफ्ती ने पीडीपी के 29, एनसी के 15 और कांग्रेस के 12 विधायकों को मिलाकर 56 विधायकों का समर्थन हासिल होने का दावा करते हुए सरकार बनाने की पेशकश की थी।

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