अमर भारती : देश भर में दिवाली का जश्न मनाने के दो दिन बाद भाई-दूज का त्योहार मनाया जाता है। रक्षा बंधन की तरह ही भैया दूज का भी त्योहार अपना महत्व रखता है। भाई-बहन के परस्पर प्रेम और स्नेह का प्रतीक भैया दूज दिवाली के बाद कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की द्वितीय तिथि को मनाया जाता है।

इस दिन बहनें अपनी भाइयों के रोली और अक्षत से तिलक करके उनके उज्जवल भविष्य की कामना करती हैं। इसे भाई बहन के प्यार और त्याग के त्योहार के रूप में मनाया जाता है। भैया दूज पर सबसे पहले यह जान लें कि टीका करने का शुभ मुहूर्त दोपहर 1 बजकर 09 मिनट से लेकर 3 बजकर 17 मिनट तक है। इन दो घंटे और 8 मिनट की अवधि में भाई को तिलक लगाना बेहद शुभकारी होगा।

भैया दूज का महत्व

भाई दूज का त्योहार दिवाली के दो दिन बाद खास रूप से दोपहर के वक्त या दोपहर के बाद मनाया जाता है। इस दिन अपने भाई को बहनें तिलक करती हैं। इसके साथ ही इस दिन व्रत भी रखा जाता है। दोपहर के बाद यम पूजा करने का भी प्रावधान है।

ऐसे करें भाई का पूजन

अगर आपने व्रत रखा है तो सूर्य को जल देकर अपना व्रत शुरू करें। शुभ मुहूर्त आने पर भाई को चौक पर बिठाएं और उसके हाथों की पूजा करें। सबसे पहले भाई की हथेली में चावल का घोल लगाएं फिर उसमें सिंदूर, पान, सुपारी और फूल इत्यादि रखें।

अंत में हाथों पर पानी अर्पण कर मंत्रजाप करें। इसके बाद भाई का मुंह मीठा कराएं और खुद भी मीठा खाएं। शाम के समय यमराज के नाम का चौमुख दीया जलाकर घर के बाहर जरूर जलाएं। मान्यता है कि इस दिन अगर बड़े से बड़ा पशु काट भी ले तो यमराज के दूत भाई के प्राण नहीं ले जाएंगे।

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