अमर भारती : संघ के ही दो ईकाई भारतीय जनता पार्टी औऱ स्वदेशी जागरण मंच में आपसी मतभेद कई बार दिखा है चाहे वह वाजपेयी सरकार में क्यआरए लिस्ट और खुदरा बाजार में विदेशी निवेश का मामला हो या मोदी सरकार में सोलर नीति या नीति आयोग का मामला हो।

आपको याद होगा मोदी सरकार के प्रमुख आर्थिक सलाहकार औऱ नीति आयोग सहित कई मुद्दों की मुखर आलोचना स्वदेशी जागरण मंच करता रहा है। मोदी सरकार की आर्थिक नीति, तेल के बढ़ते दाम और रुपये की घट रही कीमत जैसे कई गंभीर मुद्दों पर स्वदेशी जागरण मंच के सह संयोजक डॉक्टर अश्वनी महाजन से प्रबंध संपादक आलोक वर्मा ने खास बातचीत की। पेश है इस बातचीत के मुख्य अंश।

सवाल-भाजपा औऱ आप दोनों संघ से जुड़े हुए हैं मगर आप दोनों में अक्सर टकराव देखने को मिलता है कहीं यह नूरा-कुश्ती तो नहीं।

जवाब- स्वदेशी जागरण मंच का जो जन्म हुआ भूमंडलीकरण के दौरान जो अंतरर्राट्रीय ताकते हैं जिनकी नीति आम जनता के खिलाफ है उनके खिलाफ आवाज उठाना आंदोलन करना यह शुरू से ही है। सरकारें चाहे किसी की भी हों हमने यूपीए सरकार में बम मीनीमम कॉमन प्रोग्राम की तारीफ की थी हांलाकि बाद में वह अपने एजेंडे से भटक गए। बिना यह सोचे कि सता में कौन है स्वदेशी जागरण मंच निरपेक्ष भाव से अपना काम करता है इसीलिए कई बार सबको ये लगता है कि हम किसी का विरोध कर रहे हैं।

सवाल-आर्थिक नीति पर अपने देशको आप कहां पाते हैं।

जवाब-लगातार लोगों के प्रयास से भारतीय मेधा से देश आगे बढ़ रहा है। दुनिया भर में जो भी तकनीकी विकास हो रहा है उसमें भारतीयों का योगदान प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से साफ दिखाई पड़ता है। अमरीका में नासा हो या बड़े बड़े तकनीकी प्रौद्योगिकी के सस्थान हों या साइंस एंड टेक्नॉलॉजी में विकास हो किसी भी विषय में यहां तक कि जब हम मेडिकल साइंस की तरफ देखते हैं तो सबमें भारतीय मेधा आपको सामने सामने दिखाई पड़ती है।  देश अकुला रहा है विकास करने के लिए उसमें बाधाएं आती हैं जब हमारी आर्थिक नीतियां इस तरह की बनती हैं कि हम अपने स्वदेशी पर विश्वास ना करके हम ऐसा विश्वास कर बैठते हैं कि कोई विदेशी आकर के ज्यादा निवेश करेंगे उनसेहम इंपोर्ट करेंगे तो ही हमारे देश का विकास हो सकता है।

आज भारत की स्थिति बहुत अच्छी है हम दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ने वाली अर्थ व्यवस्था हैं। कई बार क्षणिक कठिनाईंयां आतीं हैं और उसके लिए एक बेहतर आर्थिक प्रबंधन की जरूरत होती है जो हर सरकार को करना चाहिए।

सवाल-वाजपेयी सरकार के समय स्वदेशी जागरण मंच का आरोप था कि सरकार अमरीकी दवाब में काम कर रही है चाहे वो क्यू आर का मामला हो या खुदरा बाजार में विदेशी निवेश अब मंच मोदी सरकार का विरोध सोलर पॉलिसी या नीति आयोग जैसे हर मुद्दे पर करता है क्या  मोदी जी का इतना विरोध जायज है।

जवाब-हमारा विरोध कभी किसी व्यक्ति विशेष से नहीं रहा है। सरकार में बहुत सारे घटक होते हैं। उसमें राजनीतिक नेतृत्व भी होता है, अफसरशाही भी होती है उसमें कंसलटेंट भी होते हैं तो हमने वहां विरोध किया है जहां कठिनाई है। मैं यह पाता  हूं कि वर्तमान सरकार का राजनीतिक नेतृत्व है उसकी दिशा अच्छी है वह लोगों के लिए काम करना चाहता है। चाहे वह स्किल की बात हो, करोड़ो लोगों के बैंक खाते की बात हो या किसानों को उपज की सही कीमत को लेकर हो। जितने निर्णय पीएमओ से होते हैं यनि राजीतिक नेतृत्व के होते हैं वह बेहतर रिजल्ट लाते हैं और जितने निर्णय नीति आयोग जैसे संस्थानों से होते हैं क्योंकि वहां कई लोगों के हित इकट्ठे हो जाते हैं इसलिए हमारा मानना है कि राजनतिक नेतृत्व को अपनी समझ बढ़ाना चाहिए इसको बढ़ाते हुए जितने लोग विदेशों से पढ़े लिखे लोग हैं वह वर्लड बैंक या आएणएफ की नीति यहां लागू कर रहे हैं उन्हें अलग रखते हुए आगे बढ़ना चाहिए।

सवाल-मोदी सरकार ने कई जगह 51 तोकई जगहों पर सौ फीसदी तक विदेशी निवेश को छूट दी है क्या आपको लगता है कि मोदी सरकार संघ की विचारधारा के खिलाफ काम कर रही है।

जवाब-देखिए सभी सरकारों की यह मजबूरी बन गई कि विदेशी निवेश नहीं होगा तो हमारा आर्थिक ढांचा चरमरा जाएगा। यह गलती उस समय की है जब हमने डब्लयूटीओ साइन किया यह गलती उस समय की थी जब हमने ट्रेड को खोल दिया। पिछले कुछ समय से फारेन पोर्टफोलियो इंवेस्टर अपना पैसा बाहर लेकर जा रहे हैं वो इस समय हमें एक तरीके से ब्लैकमेल कर रहे हैं और हमारे रुपये को डाउन कर रहे हैं। ये ब्लैकमेलिंग उस प्रकार की आर्थिक नीति को अपनाने की  वजह से ही शुरू हुआ। हमने सरकार को समझाया बातचीत की और पिछले साल बहुत सारी चीजों पर एंटी डंपिंग डयूटी लगाईं गईं 141 आइटम जिन पर ये टैक्स लगाया गया उनमें से सौ चाइना की थीं।सस्ते आयातों को रोकना होगा तभी तो उत्पादन बढ़ेगा।

सवाल- ऐसी क्या वजह है कि पेट्रोल और डीजल की कीमतें लगातार बढ़ रहीं हैं।

जवाब-तेल की कीमतों की बड़ी वजह तो अंतर्राष्ट्रीय है लेकिन इसमें थोड़ी सी कठिनाई है। सभी सरकारों खासकर राज्य सरकारों की एक आदत बन गई है कि वो अपना राजस्व बढ़ाने की जो पेट्रोल और डीजल से बढ़ जाता है। राज्य सरकार को बाजार मूल्यों के आधार पर वैट बढाने की बजाय तय रकम करनी चाहिए औऱ सरकार को तेल मूल्यों पर विचार करना चाहिए। दैनिक तेल मूल्य परिवर्तन उपयूक्त नहीं है उस पर फिर से विचार करना चाहिए।

सवाल-रुपये के अवमूल्यन का कारण।

जवाब-जब देश में डॉलर की मांग बढ़ जाती है चाहे वह किसी भी कारण से हो तो रुपये का अवमूल्यन होता है।

यदि आप पत्रकारिता जगत से जुड़ना चाहते है तो, जुड़िए हमारे मीडिया इंस्टीट्यूट से:-