अमर भारती :  भीमा कोरेगांव हिंसा से जुड़े मामले में की गई पांच वामपंथी विचारकों की गिरफ्तारी पर आज सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई। सुनवाई के दौरान दोनों पक्षों में तीखी बहस चली। सुप्रीम कोर्ट में महाराष्ट्र सरकार ने अपना पक्ष रखते हुए कहा कि उनके पास पुख्ता सबूत हैं जिनके आधार पर गिरफ्तारी की गई है। सुप्रीम कोर्ट में अब इस मामले की सुनवाई बुधवार तक के लिए रद्द कर दी गई है।

कोर्ट ने कहा है कि अगली  सुनवाई में सरकार को अपना पक्ष रखने के लिए 20 मिनट और पीड़ितों को 10 मिनट का वक्त मिलेगा। इस हिसाब से सभी एक्टिविस्टों को बुधवार तक हाउस अरेस्ट में ही रहना होगा। चीफ जस्टिस ने कहा है कि हम सभी सबूतों को देखेंगे और फैसला लेंगे। अगर संतुष्ट नहीं हुए तो मामला रद्द भी हो सकता है।

सरकार ने दावा किया है कि उन्हें लैपटॉप, हार्ड डिस्क से कई तरह के सबूत हाथ लगे हैं जो भी दस्तावेज़ बरामद किए गए हैं उनकी वीडियो रिकॉर्डिंग भी की गई है।

इस पर सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि हमे उनके खिलाफ सबूत देखना चाहते हैं। वहीं याचिकाकर्ता ने मांग की है कि इस मामले में एसआईटी जांच होनी चाहिए। SC ने याचिकाकर्ता से पूछा है कि अगर आप SIT जांच चाहते हैं तो अपनी याचिका को संशोधित कर दाखिल करें।

सुनवाई के दौरान ASG मनिंदर सिंह ने कहा कि नक्सल की समस्या गंभीर मामला है। इस तरह की याचिकाओं को सुना जाएगा तो एक खतरनाक प्रिंसिपल सेट हो जाएगा। उन्होंने सवाल किया कि क्या संबंधित अदालत इस तरह एक मामलों को नहीं देख सकती? हर मामले को सुप्रीम कोर्ट में क्यों?

 याचिकाकर्ता के वकील ने कहा कि हम इस मामले की स्वतंत्र जांच चाहते हैं, ऐसा आदेश सुप्रीम कोर्ट ही दे सकता है इसलिए यहां आए हैं। अभिषेक मनु सिंघवी ने कहा कि कुछ ऐसी रिपोर्ट आ रही हैं कि यह केस प्रधानमंत्री की हत्या की साज़िश का है, जबकि FIR में इसका कोई जिक्र नहीं है। अगर मामला इतने गंभीर आरोप से संबंधित है तो इस मामले में CBI या NIA द्वारा जांच क्यों नहीं कराई जा रही?

उन्होंने कहा कि दोनों FIR में पांचों का नाम नहीं है, ना ही उन्होंने किसी सम्मेलन में भाग लिया था। उन्होंने बताया कि इसमें सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट के पूर्व जज भी इसमें शामिल हुए थे। इससे पहले भी इन लोगों पर कई मामले दर्ज हुए थे, लेकिन सभी में वे बरी हो गए थे।

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