अमर भारती: सप्त ऋषियों की पूजा के लिए मनाई जाने वाली ऋषि पंचमी इस बार 14 सितंबर यानि आज है। बता देें की इस व्रत में सप्त ऋषि की पूजा की जाती है, भाद्रपद की शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को ऋषि पंचमी का व्रत मनाया जाता है। इस व्रत को पुरुष और महिलाएं रख सकते है। मान्‍यता है कि अगर उस दौरान किसी महिला से कोई चूक हो जाए तो वह ऋषि पंचमी का व्रत कर अपनी भूल सुधार सकती है। शास्त्रों के हिसाब से सृष्टि के रचयिता ब्रह्मा ने ऋषि पंचमी के व्रत को पापों को दूर करने वाला बताया है। मान्‍यता है कि इस व्रत को करने से महिलाएं दोष मुक्‍त हेती हैं।

जानिए ऋषि पंचमी का महत्तव और क्यो रखते है व्रत

हिन्‍दू धर्म को मानने वालों में ऋषि पंचमी का विशेष महत्‍व है। गलतियों से मुक्‍त होने के लिए इस व्रत को किया जाता है। इस व्रत के बारे में ब्रह्राजी ने राजा सिताश्व को बताया था जिसे करने से प्राणियों के समस्त पापों का नाश हो जाता है। सनातन धर्म में स्त्री जब मासिक धर्म या रजस्ख्ला (पीरियड) में होती है तब उसे सबसे अपवित्र माना जाता है। इस दोष को दूर करने के लिए वर्ष में एक बार ऋषि पंचमी का व्रत किया जाता है।

ऋषि पंचमी की तिथि और शुभ मुहूर्त 
तिथि: 14 सितंबर 2018
पूजा का मुहूर्त: सुबह 11 बजकर 0 9 मिनट से दोपहर 01 बजकर 35 मिनट तक
अवधि: 02 घंटे 26 मिनट

ऋषि पंचमी की पूजा विधि
– इस व्रत को महिलाएं रखती हैं।
– सूर्योदय से पहले उठकर स्‍नान कर लें और साफ वस्‍त्र धारण करें।
– घर के मंदिर में गोबर से चौक बनाएं।
– इसके बाद ऐपन या रंगोली से सप्‍त ऋषि बनाएं।
– अब कलश की स्‍थापना करें।
– सप्‍त ऋषि को धूप-दीपक दिखाकर फल-फूल चढ़ाएं।
– अब सप्‍त ऋषि को भोग लगाएं।
– व्रत कथा सुनने के बाद आरती करें और सभी को प्रसाद वितरण करें।

क्या नहीं खाना चाहिए

ऋषि पंचमी के व्रत में किसी नदी में स्नान करना चाहिए और कथा सुननी चाहिए साथ ही दान-दक्षिणा आदि करना चाहिए। इस व्रत को करने से धन-सम्पति और सुख- शांति का आशीर्वाद मिलता है। इस दिन सप्तऋषियों की पूजा करने से व्यक्ति के सभी प्रकार के पाप नष्ट हो जाते हैं। अविवाहित स्त्रियों के लिए यह व्रत बेहद जरुरी माना जाता है। इस दिन हल से जोते हुए अनाज को नहीं खाना चाहिए यानी की जमीन से उगने वाले अन्न ग्रहण नहीं किए जाते हैं।

मान्यता है की इस के व्रत में किसी भी नदी में स्नान करना अच्छा होता है और इसके सिवा इस दिन कथा सुनी जाती है साथ ही इस दिन दान आदि करने को भी कहा जाता है। इस व्रत को करने से धन-सम्पति और जिंदगी में सुख- शांति का आशीर्वाद मिलता है।

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