अमर भारती : आज लाखों लोग इंटरनेट के जरिए सोशल मीडिया से जुड़े हुए है। रोजाना लाखों फोटोज और वीडियोज ऐसे प्लेटफार्म पर डाली जाती है। इन्हीं में से हजारों ऐसी भी होती है जो वायरल हो जाती है। वायरल होने वाली ऐसी ही हजारों फोटोज और वीडियोज ज्यादातर बाद में नकली पाई जाती है। कई बार ऐसे पोस्ट लोगों के बीच तनाव और कभी-कभी मौत का भी कारण बन जाते है। ऐसे पोस्ट के जरिए गलत जानकारियां फैलाई जा रही थी। मगर अब ऐसे पोस्ट पर फेसबुक की खास नज़र रहेगी।

हाल ही में फेसबुक ने फैक्ट चैक की शुरुआत की थी जो की सिर्फ आर्टिकल्स के लिए था। लेकिन अब कंपनी ने फोटोज और वीडियोज के लिए भी फैक्ट चेक शुरू किया है जिससे नकली फोटोज और वीडियोज को पहचान कर उन पर उचित कार्रवाई की जाएगी। कंपनी के मुताबिक टेक्नोलॉजी और रिव्यूअर्स की मदद से फेसबुक पर पोस्ट किए गए डाटा का फैक्ट चेक करेगी।

फेसबुक प्रोडक्ट मैनेजर टेसा ल्योन्स ने एक स्टेटमेंट में कहा है, ‘किसी आर्टिकल की तरह गलत दावे किसी फोटो या बैकग्राउंड ऑडियो और वीडियो के जरिए आपको दिखाए जा सकते हैं। गलत जानकारियों से लड़ने के लिए हमें अलग-अलग कंटेंट टाइप्स का फैक्ट चेक करना होगा’।

फेसबुक ने अपने ब्लॉगपोस्ट में कहा की आज सोशल मीडिया पर अपलोड होने वाली कई तस्वीरें और वीडियोज का गलत इस्तेमाल होता आ रहा है और हम ऐसे ही डाटा मिसयूज को रोकने के लिए अब हर कंटेंट का रिव्यू कर उसका फेक्ट चैक करेंगे।

फेसबुक ने कहा है, ‘हमारे थर्ड पार्टी फैक्ट चेकिंग पार्टनर्स फोटोज और वीडियोज को समझने में एक्सपर्ट्स हैं। वेरिफेकशन के लिए कई तरीके होते हैं जैसे रिवर्स इमेज सर्च और इमेज के मेटाडेटा से जानकारी हासिल करना। मेटा डेटा यानी कब और कहां ये तस्वीर क्लिक की गई थी इन सब की जानकारी अब ये एक्सपर्ट्स आराम से निकाल कर फोटोज और वीडियो की सच्चाई की पड़ताल कर सकते हैं और अगर जरूरत पड़ी तो वो एक्सपर्ट्स और सरकारी एजेंसियों से इन मामलों पर जानकारी लेकर भी फैक्ट चेक कर सकते हैं। माना यह जा रहा है कि फेेसबुक की इस पहल से साइबर क्राइम में काफी हद तक नकेल कसी जा सकेगी।

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