अमर भारती : पेट्रोल-डीज़ल के बढ़ते दाम और राफेल डील के मुद्दे पर मोदी सरकार पर पहले से ही आक्रामक चल रहे विपक्ष को एक और मुद्दा हाथ लगा है। बुधवार को शराब कारोबारी विजय माल्या ने कहा कि उन्होंने भारत छोड़ने से पहले अरुण जेटली से मुलाकात की थी। अब कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी इस मुद्दे पर गुरुवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस की। राहुल पहले ही ट्वीट कर अरुण जेटली का इस्तीफा मांग चुके हैं।

कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने कहा कि बुधवार को अरुण जेटली ने कहा कि विजय माल्या ने उनको संसद से अनौपचारिक मुलाकात की थी। वह लंबे ब्लॉग लिखते हैं, लेकिन इस बारे में कुछ नहीं लिखते। अरुण जेटली मुलाकात के बारे में झूठ बोल रहे हैं। इस दौरान उन्होंने साथी नेता पीएल पुनिया की बात कही, कि उन्होंने दोनों को बात करते हुए देखा था। राहुल ने कहा कि हमारे पास सबूत है। पीएल पुनिया ने बताया कि बजट पेश होने के अगले दिन 1 मार्च को अरुण जेटली और विजय माल्या बात कर रहे थे। वह करीब 15-20 मिनट तक बात करते रहे, पहले दोनों खड़े होकर बात कर रहे थे और उसके बाद दोनों वहीं सेंट्रल हॉल में बैठकर बात करने लगे।

देश के हज़ारों-करोड़ लेकर फरार चल रहे कारोबारी विजय माल्या के एक बयान से भारत की राजनीति में भूचाल आ गया है। बुधवार को लंदन में विजय माल्या ने दावा किया कि भारत छोड़ने से पहले वह वित्त मंत्री अरुण जेटली से मिले थे। जिसके बाद विपक्ष अरुण जेटली का इस्तीफा मांगने में जुटा है। इस बीच कांग्रेस नेता पीएल पूनिया ने भी दावा किया है कि उन्होंने अरुण जेटली को विजय माल्या से मिलते हुए देखा था। दरअसल, बुधवार को जैसे ही माल्या ने इस मुलाकात का जिक्र किया। उसके कुछ ही देर बाद वित्त मंत्री अरुण जेटली ने बयान जारी करते हुए सफाई दी कि वह माल्या से मिले थे, लेकिन वह मुलाकात आधिकारिक नहीं थी।

इसके बाद कांग्रेस नेता पीएल पुनिया ने ट्वीट किया। उन्होंने लिखा कि अरुण जेटली झूठ बोल रहे हैं, मैंने सेंट्रल हॉल में उन्हें माल्या के साथ लंबी बैठक करते हुए देखा था। ये बैठक माल्या के लंदन के लिए जाने से दो दिन पहले हुई थी।

अरुण जेटली ने दी थी सफाई

अरुण जेटली ने फेसबुक पर इस संबंध में सफाई देते हुए कहा, ‘माल्या का दावा तथ्यात्मक रूप से गलत है। मैंने 2014 से अब तक उन्हें मिलने का टाइम नहीं दिया। वह राज्यसभा सदस्य थे और कभी-कभी सदन में आया करते थे। मैं सदन से निकलकर अपने कमरे में जा रहा था, इसी दौरान वह साथ हो लिए। उन्होंने समझौते की पेशकश की थी, जिस पर मैंने उन्हें रोकते हुए कहा कि मेरे साथ बात करने का कोई फायदा नहीं, यह प्रस्ताव बैंकों के साथ करें।’

माल्या ने दिया था ये बयान

कोर्ट में सुनवाई के बाद पत्रकारों ने जब वित्त मंत्री से मुलाकात को लेकर सवाल पूछा तो माल्या ने कहा कि वह इस मीटिंग के बारे में विस्तार से जानकारी नहीं दे सकते हैं। गौरतलब है कि जिस समय माल्या देश छोड़कर गए, उस समय अरुण जेटली वित्त मंत्री थे। बातचीत के दौरान माल्या ने कहा कि वह कोर्ट में दिखाए गए जेल के विडियो को देखकर प्रभावित हैं। माल्या ने कहा कि अपने बकाए को सैटल करने के लिए उन्होंने बैंकों को कई बार पत्र लिखे थे, लेकिन बैंकों ने उनके पत्रों पर सवाल खड़े किए थे।

माल्या ने कहा कि निश्चित तौर पर उन पर जो आरोप लगाए गए हैं, वह उनसे सहमत नहीं हैं। इसके अलावा इस बारे में कोर्ट ही अंतिम फैसला लेगी। बता दें कि माल्या ने कहा था कि भारतीय जेलों की हालत बेहद खराब है, इसलिए उन्हें भारत को न सौंपा जाए। प्रत्यर्पण से बचने के लिए माल्या की इस दलील के बाद ब्रिटिश कोर्ट ने भारतीय अधिकारियों से जेल का विडियो पेश करने को कहा था।

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