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अमर भारती : झारखंड में निछली अदालत में झारखंड के पूर्व मंत्री  योगेंद्र साव और उनकी विधायक पत्नी पर दर्ज मामले की वॉट्सऐप वीडियो कॉलिंग के जरिये सुनवाई किए जाने पर सुप्रीम कोर्ट ने हैरानी जताई है। उनका कहना है कि अदालत में इस तरह के ‘मजाक’ की कैसे इजाजत दी जा सकती है।

असल में झारखंड के पूर्व मंत्री और उनकी पत्नी निर्मला पर 2016 के दंगों का आरोप है और इस मामले में अदालत ने उन्हें कुछ शर्तो पर जमानत दी थी। शर्त के मुताबिक उन्हें भोपाल में ही रहना था इसके अलावा वे झारखंड में प्रवेश नहीं करेंगे। मगर निछली अदालत द्वारा दी गई वॉट्सऐप वीडियो कॉलिंग की अनुमती पर सुप्रीम कोर्ट ने नाराज़गी जताई है और कहा है कि यह अदालत के नियमों का उल्लंघन है।

सुप्रीम कोर्ट बैंच ने दोनों आरोपियों की याचिका पर झारखंड सरकार को नोटिस जारी करते हुए दो सप्ताह के भीतर राज्य से इसका जवाब देने को कहा है।सुप्रीम कोर्ट के जस्ट‍िस एसए बोबड़े और जस्टिस एलएन राव की बेंच ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए कहा, ‘झारखंड में क्या हो रहा है? इस प्रक्रिया की इजाजत नहीं दी जा सकती है और हम न्याय प्रशासन की बदनामी की इजाजत नहीं दे सकते।’

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