अमर भारती : असम में नेशनल रजिस्टर ऑफ सिटिजन्स (एनआरसी) के आखिरी ड्राफ्ट में 40,07,707 लोगो की नागरिकता संदिग्ध पाई गई है और उनका नाम उसमे शामिल नही है। अब उनका बायोमेट्रिक रिकॉर्ड लिया जाएगा। इस बारे मे केंद्र सरकार ने कहा कि वह उन 40 लाख लोगो का बायोमेट्रिक्स का ब्योरा लेने पर विचार कर रहे हैं, ताकि गलत पहचान के साथ दूसरे राज्यो मे उनके प्रवेश को रोका जा सके। के.के. वेणुगोपाल ने कहा, “उन राज्यो की आशंकाऐ दूर करने के लिए सरकार 40 लाख लोगों का बायोमेट्रिक डाटा एकत्र करने पर विचार कर रही है क्योंकि यदि उन्हें विदेशी माना जाता है या वे गलत पहचान के साथ दूसरे राज्यों में चले जाते है तो संबंधित अधिकारी उसका पता कर सकें।”

इस पर पीठ ने कहा “आप जो भी करना चाहें करे, फिलहाल हम टिप्पणी नहीं करना चाहते। आप इससे करे तब हम इसकी जांच करेंगे। हमारी चुप्पी सहमति या आश्वाशन का प्रतीक नही है।” शीर्ष अदालत ने कहा कि जिन 40 लाख से अधिक लोगों के नाम एनआरसी के अंतिम ड्राफ्ट में शामिल नही है, उनके खिलाफ कार्रवाई नही की जाएगी क्योंकि यह सिर्फ ड्राफ्ट है।

शीर्ष अदालत की पीठ ने केंद्र के दावों और ड्राफ्ट एनआरसी के प्राकाशक से उपजी आपत्तियों पर फैसला करने के लिए समय सीमा तय करने के साथ इसका स्वरूप और मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) तैयार करने को कहा। पीठ ने केंद्र को इसके तौर-तरीके और एसओपी 16 अगस्त तक मंजूरी के लिए उसे सौंपने को कहा। सुनवाई के अंत मे ट्रान्सजेंडरों ने पीठ से उन्हें एनआरसी फार्म भरने का दूसरा मौका देने का अनुरोध किया। इस पर पीठ ने कहा “ आपने मौका गंवा दिया, हम समूची कवायद को अब दोबारा शुरू नही कर सकते।” हालांकि इस मामले पर अगली तारीख 16 अगस्त को सभी इंटरलोक्यूटरी ऐप्लिकेशन पर सुनवाई करने को कहा है।

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