अमर भारती: विश्र्व भर में विश्र्व जनसंख्या दिवस 1989 से 11 जुलाई को मनाया जा रहा है। इस दिन का उद्देश्य  विश्व जनसंख्या को काबू में लाना और स्वास्थ्य के महत्व के बारे में जागरूकता फैलाना है। विश्व जनसंख्या दिवस 2018 का विषय यह है कि, “परिवार का नियोजन एक मानव अधिकार है।” दरअसल, तेजी से बढ़ती दुनिया की आबादी ने हमारे सामने कई समस्यए खड़ी कर रखी हैं। दुनिया की आबादी 760 करोड़ तक पहुंच गई है जो हर दिन बढ़ती ही जा रही है। बढ़ती आबादी से जुड़ी समस्याओं से निपटने के लिए हर साल 11 जुलाई को पूरी दुनिया में मनाया जाता है।

अनियंत्रित आबादी के कारण हर बच्चे को सही भोजन और शिक्षा नहीं मिल पा रही हैं और लोगों के स्वास्थ्य पर काफी असर पड़ रहा हैं। इस दिवस को मनाने का मुख्य कारण यह भी है कि बड़ी संख्या में गर्भवती महिलाएं गरीब प्रजनन स्वास्थ्य कि शिकार हो जाती हैं। तथ्यो से पता चला है कि एक बच्चे कि जन्म की प्रक्रिया के कारण हर दिन लगभग 800 महिलाओं की जाने जाती हैं। इसलिए, इस दिन का प्राथमिक उद्देश्य और महत्व यह है कि अधिक से अधिक लोगों को यह पता होना चाहिए  कि परिवार के नियोजन के महत्व पर उनके प्रजनन स्वास्थ्य का ध्यान कैसे बढ़ाया जाए।

परिवार नियोजन की महत्ता को समझते हुए भारत में अब सीमित परिवार पर जोर देना शुरु कर दिया है। आबादी पर अंकुश लगाने के लिए सीमित परिवार के फायदे बताए जा रहे हैं। “परिवार नियोजन एक मानव अधिकार है,” यह नारा पहली बार, 50 वर्षीय कानून का जवाब देता है, कि यदि महिलाएं चाहें, तो वह कई गर्भावस्थाओं के लिए मना कर सकती है और चुन सकती है कि वह कितने बच्चे चहाती है।

बढ़ती जनसंख्या – भारत में एक बड़ी समस्या

भारत को बढ़ती आबादी की समस्या का सामना करना पड़ रहा है। दुनिया की करीब 17% आबादी भारत में रहती है जिससे यह दुनिया के सबसे अधिक आबादी वाले देशों में से एक है। लगभग हर विकासशील देश की तरह भारत में जनसंख्या बढ़ने के कई कारण हैं, इनमें से सबसे प्रमुख कारण है लोगों का अशिक्षित होना। उनके शिक्षित होने से उनके अंदर जागरूकता आएगी जिससे इस समस्या से निपटा जा सकता है। अशिक्षित और गरीब वर्ग के लोग अधिक संख्या में बच्चों को जन्म देते हैं। इसके लिए दो कारण हैं। सबसे पहले उनके लिए अधिक बच्चे काम करने और परिवार के लिए पैसे कमाने में मदद करते हैं। दूसरा उनमें से ज्यादातर लोगों बढ़ती आबादी की समस्या के बारे में जानते ही नहीं।

क्यों मनाते हैं- 

इस दिन के जरिए लोगों का ध्यान प्रजनन स्वास्थ्य समस्याओं की ओर भी दिलाना है क्योंकि खराब स्वास्थ्य दुनिया भर में गर्भवती महिलाओं की मौत का प्रमुख कारण है। भारत और चीन समेत दुनिया के कई देश आज बढ़ती जनसंख्या पर पैनी नज़र रखने लगे हैं। विकास की राह पर आगे बढ़ने की कोशिश में लगे देशों के लिए बढ़ती आबादी आज एक अहम मुद्दा है।

जनसंख्या भारत के लिए एक बड़ी चुनौती-

जनसंख्या भारत के लिए अहम चुनौती आंकड़ों की मानें तो केवल भारत में हर मिनट 25 बच्चे पैदा होते हैं, ये वो आंकड़ा है जो कि अस्पतालों में दर्ज है लेकिन भारत में अभी भी बहुत सारे बच्चे अस्पताल में पैदा नहीं होते हैं इसलिए उनका आंकड़ा कहीं पर मौजूद नहीं है। विशेषज्ञों का अनुमान है कि अगर भारत ने अपनी तेजी से बढ़ रही जनसंख्या की दर कम करने के लिए जल्दी कुछ ठोस कदम नहीं उठाए तो 2030 तक वह विश्व में सबसे बड़ी आबादी वाला देश कहलाएगा।

आज के समय में जनसंख्या भारत के सामने एक बहुत बड़ी चुनौती है। जरूरी है कि जनता और सरकार मिलकर इस दिशा में काम करे और आगे बढ़े। जनसंख्या को कम करने में भारत को सही और बेहतर कदम उठाने की जरूरत है। लोगों को शिक्षित करना, उन्हें इसके प्रति जागरूक करना और जनसंख्या कम करने के लिए निवारण खोजना आज के समय की सबसे अहम चुनौती है।

 

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