दिन दहाडे़ हो रहा बालू का अवैध खनन

 रेलवे पुल के सन्निकट दिनदहाड़े हो रहा बालू-ंउचयखनन ।
 ऐसे खनन के लिए कौन है जिम्मेदार, किसकी बनती है जवाबदेही ?
 यहॉ हर साख पर उल्लू बैठा है ।

सिद्धार्थनगर। कहने को तो मिट्टी के खनन से ही प्रतिबन्ध यू0पी0 सरकार द्वारा हटा लिया गया है । रेत(बालू) खनन पर प्रतिबन्ध आज भी है । किन्तु इस समाचार के साथ प्रकाशित फोटो को देखकर ऐसा नहीं लगता कि रेत खनन पर प्रतिबन्ध जारी है । जिम्मेदार एवं जवाबदेह विभाग के अधिकारी कुछ भी दावा करते किन्तु उनके दावे में कितना दम है जनपद के शोहरतग-सजय़ तहसील अन्तर्गत स्थित महथा रेलवे पुल के पास बानगंगा नदी में दिनदहाड़े ट्रक पर हो रहे बालू खनन वस्तु स्थिति का नंगा सच सामने ला देता है ।

जानकार सूत्रों के दावे को यदि सत्य माने तो लाइन व्यवस्था के चलते जारी प्रतिबन्ध को जिम्मेदार एवं जवाबदेह अधिकारी ऑख मूंदकर आनाकानी कर देते हैं । वैसे बालू खनन के सम्बन्ध में यह भी हकीकत है कि बालू तस्कर इण्डो-ंउचयनेपाल सीमा की सुरक्षा एजेन्सी से लाइन व्यवस्था के चलते निपटते हुए भारत के सीमावर्ती क्षेत्रों में सफेद मोटे रेत की डिमाण्ड को पूरा करते हैं । रही बात छोटी-ंउचयमोटी डिमाण्ड की तो उसपर साइकिल तस्करों का ही अधिपत्य बना हुआ है । दिन हो या रात बानगंगा नदी के आस-ंउचयपास के गॉव के ट्रैक्टर ट्राली वाले अवैध खनन के व्यापारी स्थानीय पुलिस को प्रभावित कर आस-ंउचयपास के दसियों कोस स्थित गॉव के डिमाण्ड को पूरा करते हैं ।

विगत वर्ष के अगस्त माह में शोहरतग-सजय़ थाना अन्तर्गत स्थित ग्राम पंचायत नदवलिया क्षेत्र अन्तर्गत बानगंगा नदी में कोटिया ग्राम के प्रभावशाली व्याक्ति द्वारा किये जा रहे बालू के अवैध खनन पर 100 नं0 पुलिस के आ धमकने पर उक्त ट्रैक्टर के ड्राइबर ने भागने की फिराक में उस घाट के मल्लाह की -हजयोपड़ी में ट्रैक्टर घुसा दिया जिसकी चपेट में आने के बाद उसे महीनों दवा करानी पड़ी ।

मामला पुलिस के संज्ञान में आने के बाद भी बिना ड्राइवरी लाइसेंस के ड्राइवर के साथ पुलिस न तो यथोचित कार्यवाही कर सकी न ही ट्रैक्टर मालिक के साथ । भला जहॉ स्थिति ऐसी हो कि ऊपर से लेकर नीचे तक जिम्मेदार अधिकारी ऑख मूंदे कान में तेल डालकर चुपचाप बैठे हों ऐसी स्थिति में बालू के अवैध खनन पर प्रतिबन्ध लगाये जाने की बात को सोचना दिवा स्वप्न सा लगता है । किसी ने ठीक ही कहा है कि ‘‘बरबाद गुलिस्ता करने को एक ही उल्लू काफी है । अंजाम गुलिस्तां क्या होगी, जहॉ हर साख पर उल्लू बैठा है । ’’