ठहरिये। ये है बुद्ध की राजधानी जाने वाला मुख्य मार्ग

सिद्धार्थ नगर। उप्र की सड़कों की बात न करें तो जनपद मुख्यालय की सड़कों का हाल किसी से छुपा नहीं है। वह चाहे मुख्यालय से बांसी जाने वाला मार्ग हो या फिर अंतर्राष्ट्रीय महत्व रखने वाली बुद्ध की राजधानी कपिलवस्तु को जाने वाला मार्ग। पिछले कई माह से अपने उद्धार की राह देख रहा यह मार्ग जनप्रतिनिधियों सांसद और विधायकों की अनदेखी की मार भी झेल रहा है।

सूखी हालत में यह मार्ग आने जाने वालों और वहां के निवासियों को सांस का रोगी बनाने के साथ खाद्य पदार्थों को भी दूषित बना रहा है। वहीं दूसरी ओर एक हल्की सी बरसात में यह किसी तालाब का दृश्य भी दिखाता है। यानि किसी फिल्म की तरह एक टिकट में यहां कई दृश्य देखने को मिलते हैं। जनपद में विकास के दावे धरातल पर कितने सही हैं यह इन मार्गों को देखकर जाना जा सकता है।

जानकारी के मुताबिक योगी सरकार के आते ही पुराने सभी सड़कों के ठेके निरस्त कर दिये गये। जिस कारण काम बंद हो गये और ठेकेदारों ने भी किनारा कर लिया। मौजूदा सांसद केवल ट्रेनों को हरी झंडी दिखाने में ही विकास को ढूंढ रहे हैं जबकि बहुतेरे यात्रियों को इन्हीं टूटी-फूटी सड़कों पर स्वयं को बचाते हुए रेल्वे स्टेशन तक पहुंचना पड़ता है। देखा जाये तो प्रदेश सरकार का गड्ढा मुक्त सड़कों का दावा गड्ढा युक्त ही दिखाई दे रहा है।