विजय त्रिपाठी, लखनऊ। गुरुवार को लखनऊ में देश के सभी राज्यों के होमगार्ड डीजी इकट्ठा हुये। दिल्ली में हुये अधिवेशन के 21 सालों बाद ऑल इंडिया डीजी होमगार्ड कांफ्रेंस का आयोजन किया गया। इस मौके पर डीजी होमगार्ड के साथ मुख्य सचिव राजीव कुमार भी शामिल हुये। होमगार्ड विजन 2030 के नाम से आयोजित इस कांफ्रेंस में देश के अन्य राज्यों में होमगार्ड फोर्स को मिलने वाले वेतनमान, भत्ते, ट्रेनिंग के साथ-साथ उनको और बेहतर बनाने पर विचार किया गया।

यूपी समेत तमाम राज्यों की पुलिस फोर्स के साथ कंधे से कंधा मिलाकर ड्यूटी करने वाला होमगार्ड विभाग किसी से कम नहीं है। रैली हो, मेला हो या फिर प्रदर्शन और या फिर लखनऊ, वाराणसी, नोएडा जैसे बड़े शहरों की ट्रैफिक ड्यूटी, ऐसी तमाम जगहों पर उत्तर प्रदेश पुलिस के साथ जो दूसरा खाकीधारी बराबर की ड्यूटी करता दिखता है, वो उत्तर प्रदेश पुलिस का होमगार्ड होता है। लेकिन जानकर ताज्जुब होगा कि ड्यूटी यूपी पुलिस के सिपाही से कम नहीं लेकिन इनको मिलने वाला मेहनताना मजदूरों से भी कम है। यूपी में एक होमगार्ड को 8 से 10 घंटे की ड्यूटी पर जिले में 375 रूपया और अन्य जिले में 475 रूपया मिलता है। उसमें भी ड्यूटी महीने भर मिलेगी, इसकी गारंटी नहीं।

वहीं दूसरी ओर देश के अन्य राज्यों चाहे मध्य प्रदेश, दिल्ली, पंजाब, महाराष्ट्र, बिहार में इनके होमगार्डों को मिलने वाला वेतन यूपी के होमगार्डों से कई गुना अधिक है। पंजाब में एक होमगार्ड को 1029 रूपये रोज का वेतनमान यानि 30,870 रूपया महीना मिलता है। वेतनमान की विसंगति बता रही है कि आधुनिकीकरण और बेहतर पुलिसिंग का दावा करने वाली यूपी की सरकार और नौकरशाही देश के दूसरे राज्यों से कितना पीछे है। इतना ही नहीं यूपी में होमगार्ड की शहादत का भी मोल नहीं है। पंजाब में बीते साल दीनानगर हमले में शहीद हुये तीन होमगार्ड के परिजनों को पंजाब सरकार ने तमाम सहायता राशि के साथ नौकरी दी। वहीं दूसरी ओर उत्तर प्रदेश में ड्यूटी पर होमगार्ड की मृत्यु पर सिर्फ तीन लाख की सहायता का प्रावधान है। बता दें कि 1963 में स्थापना के बाद से यूपी में 1310 होमगार्ड शहीद हो चुके हैं। लेकिन इनकी शहादत का मोल हमेशा कम ही आंका गया।

वैसे राज्य की मुख्य फोर्स की अपेक्षा होमगार्ड की दुर्दशा हर राज्य में है लेकिन यूपी में हालत बदत्तर है। इसकी वजह भी है कि इस फोर्स के डीजी कांफ्रेंस को ही 21 साल बाद किया जा रहा है तो अंदाजा लगाइये की होमगार्ड को लेकर सरकारें और नौकरशाही कितनी गंभीर होगी। वैसे ऑल इंडिया डीजी होमगार्ड कॉन्फ्रेंस के जरिए होमगार्ड को कैसे बेहतर बनाया जाए, कैसे उसको जवानों को बेहतर प्रशिक्षण दिया जाए, कैसे प्रदेश के कानून-व्यवस्था में बेहतर इस्तेमाल किया जा सके। इन तमाम मुद्दों पर चर्चा की गई। कार्यक्रम में शिरकत करने आये मुख्य सचिव राजीव कुमार ने भी यूपी में होमगार्ड की बेहतरी का आश्वासन दिया। उनके प्रस्तावों को जल्द मंजूरी मिलने की उम्मीद जताई है।

इस एक दिवसीय सम्मेलन के बाद उत्तर प्रदेश में होमगार्डों की बेहतरी के लिए कितना काम होगा, यह तो कुछ महीनों में ही साफ हो जायेगा। लेकिन इस तस्वीर को देखने के बाद इतना जरूर कहा जा सकता है कि उत्तर प्रदेश में यूपी पुलिस ही नहीं बल्कि यूपी पुलिस की सहायक, होमगार्ड फोर्स में भी संसाधनों की मारी है। सरकार की अनदेखी के चलते इसकी हालत मजदूरों से भी बदतर हो गई है। एक तरफ उत्तर प्रदेश पुलिस कम संख्या बल से जूझ रही है तो दूसरी तरफ फोर्स के पास मौजूद 32,000 ऑल ट्रेंड होमगार्ड कम वेतनमान और कम ड्यूटी के चलते हाशिए पर हैं।