लखनऊ। उत्तरप्रदेश के राज्यपाल राम नाईक ने कहा कि समय से कार्य हो तो पचास प्रतिशत समस्याएं अपने आप समाप्त हो जायें। वर्ष 2005 में आरटीआई एक्ट आया और वर्ष 2006 में प्रदेश ने इसे अपनाया। वर्ष 2015 में सूचना से सम्बन्धित समस्त नियमावली बनी। शनिवार को अलीगंज स्थित आंचलिक विज्ञान केन्द्र में फाउण्डेशन फार पीपूल राइट टू इन्फारमेशन के बैनर तले आयोजित 12 वां आरटीआई संगोष्ठी में अध्यक्षता कर रहे उत्तर प्रदेश के राज्यपाल राम नाईक ने अपने जीवन से जुड़े राजनीतिक पृष्टभूमि के बारें में बताया और अंत में आरटीआई कानून को कड़ाई से पालन कराने एवं उससे जुड़े भ्रम को दूर करने पर जोर दिया।

राज्यपाल ने कहा कि आईटीआई का ज्यादा से ज्यादा उपयोग होना चाहिए। आईटीआई की समझ बढ़ाने के लिए उसके बारे में पढ़े और लोगों को उससे सम्बन्धित जानकारी को बांटें। उन्होंने कहा कि राज्यपाल के पास सूचना से सम्बन्धित मामलों पर चर्चा करने के लिए तीन से चार लोगों की समिति बनाकर मिलिए। आईटीआई से जुड़े प्रयासों के लिए उनका सहयोग बना रहेगा।

कार्यक्रम में मौजूद सेवानिवृत न्यायमूर्ति कमलेश्वरनाथ ने कहा कि उत्तर प्रदेश की सरकार से कानून को जानने वाले मांग करते हैं कि सूचना के तहत मांगें जाने मूल्यों पर विचार हो। जहां एक ओर देश की लोकसभा व राजयसभा में सूचना प्राप्त करने के लिए 10 रूपये लगते है, वहीं विधानसभा से सूचना प्राप्त करने को 500 रूपये लग रहे हैं। इसमें संशोधन होना चाहिए, ​जिससे मूल्य में कमी आये।

उन्होंने राजनीति से जुड़े घटना का जिक्र करते हुए कहा कि मायावती के शासनकाल में मंत्रियों को अपनी बातों को बताने का अधिकार नहीं था। केवल मायावती ही किसी भी विभाग की जानकारी देती थी। मंत्री अपने विभाग की सूचना भी नहीं दे सकता था। ऐसे हालात दोबारा ना बने, इसका प्रयास होना चाहिए।

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