नयी दिल्ली। एनएचपीसी के अध्यक्ष सह प्रबंध निदेशक श्री बलराज जोशी को निर्माण क्षेत्र में उनकी उपलब्धियों के लिए सीआईडीसी (कंस्ट्रक्शन इंडस्ट्री डेवलपमेंट कौंसिल) के प्रतिष्ठित 10 वें विश्वकर्मा अवार्ड समारोह में इंडस्ट्री डॉयन के रूप में सम्मानित किया गया। दिल्ली स्थित इंडिया हैबिटैट सेंटर के स्टेन ऑडिओटोरियम में आयोजित एक भव्य समारोह में निर्माण उद्योग से जुड़े कई गणमान्य हस्तियों की उपस्थिति में देश भर में निर्माण क्षेत्र में काम कर रही 60 कंपनियों को 16 कैटेगरी में ट्रॉफी दी गयी। कुछा लोगों और संस्थाओं को मेडल और सर्टिफिकेट्स भी दिए गए। समारोह में निर्माण उद्योग जगत की कई बड़ी हस्तियां शामिल हुईं।

इस अवसर पर केंद्रीय सामाजिक न्याय एवं सशक्तिकरण राज्यमंत्री श्री रामदास अठवाले ने निर्माण उद्योग के विकास में सीआईडीसी के योगदान की सराहना की और कहा कि विश्वकर्मा अवार्ड ने निर्माण उद्योग में काम कर रही कंपनियों के बीच बेहतर काम करने की प्रतिस्पर्धा उत्पन्न की है, जिससे न केवल निर्माण कार्यों की गुणवत्ता बढ़ी है बल्कि उद्योग में काम कर रहे लोगों की स्थिति में सुधार हुआ है और पर्यावरण संरक्षण और सुरक्षा के प्रति लोगों में जागरूकता भी बढ़ी है। सीआईडीसी के चेयरमैन श्री पी एस राणा ने बताया कि  निर्माण उद्योग में बेहतर कार्यप्रणाली और कार्य प्रबंधन को बढ़ावा देने और गुणवत्ता बढ़ाने के लिए सीआईडीसी पिछले 10 वर्षों से हर साल इस इंडस्ट्री के सभी साझेदारों को उनकी गुणवत्ता के आधार पर सम्मानित कर रही है। ये सम्मान निर्माण क्षेत्र के साझीदारों मिस्त्री, सुपरवाइजर, इंजीनियर, प्रबंधन और संस्थाओं को उनके उल्लेखनीय योगदान के लिए दिया जाता है ताकि वो अपने क्षेत्र में रोल मॉडल बन सकें।

उन्होंने बताया कि इस वर्ष निर्माण उद्योग को दिशा देने और उसमे उल्लेखनीय योगदान देने के लिए आईसीएसीआई( इंडियन चम्बेर ऑफ़ अमेरिकन कंक्रीट इंस्टिट्यूट) के पूर्व अध्यक्ष और सुप्रसिद्ध फॉरेंसिक इंजीनियर स्वर्गीय आर एन रायकर और स्वर्गीय एम सुब्रमणियम को मरणोपरांत डॉ. सर मोक्षगुण्डम विश्वेसरैया और सर मिर्ज़ा मोहम्मद इस्माइल लाइफ टाइम अचीवमेंट से सम्मानित किया गया। निर्माण क्षेत्र में अमूल्य योगदान देने वाले उद्योग जगत के अग्रिम लोगों को ये अवार्ड हर वर्ष दिया जाता है।

सीआईडीसी के महानिदेशक डॉ पीआर स्वरूप ने बताया कि ‘आज का दिन भारतीय निर्माण उद्द्योग के लिए बहुत महत्वपूर्ण है। आज ही के दिन 1996 में योजना आयोग (आज का नीति आयोग) ने सीआईडीसी की स्थापना की थी।’ सीआईडीसी देश में निर्माण उद्योग से जुड़ी सभी निजी और सरकारी कंपनियों की सर्वोच्च संस्था है। डॉ स्वरूप ने बताया कि 10 वर्ष पहले सीआईडीसी ने सोंचा कि क्यों न आज के दिन को निर्माण उद्योग में बेहतर कार्य प्रणाली विकसित करने के लिए इस्तेमाल जाये। फिर विश्वकर्मा अवार्ड का आयोजन शुरू किया गया और तभी से इस समारोह का आयोजन हर साल 7 मार्च को किया जाता है, ये अवार्ड हमारी भारतीय विश्वास के अनुसार निर्माण उद्योग के भगवान् श्री विश्वकर्मा जी से प्रेरित है। इसी दिन सीआईडीसी का स्थापना दिवस भी मनाया जाता है।

डॉ स्वरूप के अनुसार विश्वकर्मा अवार्ड की प्रतिष्ठा कितनी है, इसका अंदाज़ा साल दर साल आवेदकों की बढती संख्या और उनके प्रोफाइल से लगाया जा सकता है। देश के नवरत्न सार्वजनिक उपक्रम ही नहीं बल्कि प्रतिष्ठित निजी कंपनियां भी प्रोजेक्ट्स का मूल्याङ्कन करवाती हैं और इस पुरस्कार को पाकर गर्व का अनुभव करती हैं। उनके अनुसार विश्वकर्मा अवार्ड की सबसे खास विशेषता है कि ये अवार्ड केवल कंपनीज, एमडी – सीईओ या प्रबंधकों के लिए ही नहीं है, ये निर्माण क्षेत्र में हर किसी के योगदान को सम्मान देती है चाहे वो मज़दूर हो या मिस्त्री। इस साल देश भर के अलग अलग प्रोजेक्ट्स और साइट्स पर काम करने वाले 46 मिस्त्रियों और सुपरवाइजरों को निर्माण उनके उल्लेखनीय योगदान के लिए ट्रॉफी, मेडल और सर्टिफिकेट्स से सम्मानित किया गया।

पिछले 10 सालों  की अपनी यात्रा में विश्वकर्मा अवार्ड आज निर्माण उद्योग के अलग अलग क्षेत्र में काम कर रहे लोगों के लिए प्रेरक बन गया है कि वो कैसे अपने प्रदर्शन को बढ़ाएं और सम्मान हासिल करें। पूरे दिन चले इस समारोह मुख्य  सूचना आयुक्त आर के माथुर, अखिल भारतीय तकनीकी शिक्षा परिषद् (एआईसीटीई) के वाईस चेयरमैन डॉ. एम पी पुनिया योजना आयोग के पूर्व सदस्य डॉ, प्रबीर सेन, मध्यप्रदेश के पूर्व अतिरिक्त मुख्या सचिव प्रदीप गर्व, एनएचपीसी के पूर्व अध्यक्ष सह प्रबंध निदेशक के एम सिंह, सी पी डब्ल्यू डी के पूर्व महानिदेशक दिवाकर गर्ग, आईएल एंड एफएस के मुख्या कार्यकारी अधिकारी एमडी खट्टर, पावर फाइनेंस कारपोरेशन के पूर्व अध्यक्ष सह प्रबंध निदेशक उद्देश  कोहली समेत निर्माण उद्योग से जुड़े लगभग 1000 लोगों ने हिस्सा लिया।

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