लखनऊ। अखिल भारतीय मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड (एआईएमपीएलबी) के बर्खास्त कार्यकारी सदस्य सैयद सलमान हुसैनी नदवी ने आज कहा कि अयोध्या विवाद का हल ढूंढने के लिये उनका प्रयास जारी रहेगा। नदवी ने कहा कि राम जन्मभूमि मंदिर विवाद का हल उच्चतम न्यायालय के फैसले की बजाय बातचीत के जरिये हल ढूंढना चाहिये। बयान के बाद बोर्ड ने कल हैदराबाद में हुई कार्यकारी की बैठक में नदवी को बर्खास्त कर दिया था। बोर्ड ने कहा कि अयोध्या में मस्जिद के साथ कोई समझौता नहीं किया जायेगा। मस्जिद अपनी जगह पर ही बनेगी। बर्खास्त बोर्ड के सदस्य नदवी 20 फरवरी को अयोध्या मंदिर विवाद का सौहार्दपूर्ण हल ढूंढने के लिये आध्यात्यमिक गुरू श्री श्री रवि शंकर के साथ दूसरे दौर की बैठक में शामिल होंगे।

नदवी ने आज बताया कि बोर्ड के कुछ सदस्यों ने उनके साथ साजिश की और उन्हें बोर्ड से बर्खास्त करा दिया। उन्होंने कहा कि एक सदस्य को बिना कारण बताओ नोटिस दिये कैसे बोर्ड से निकाला जा सकता है। गत नौ फरवरी को बोर्ड की बैठक में भाग लेने के बाद उन्होंने खुद ही इसका बहिष्कार किया था और बोर्ड से अलग हो गये। नदवी ने कहा कि बोर्ड को भंग किया जाना चाहिये। इसके स्थान पर शरियत के अनुसार नये बोर्ड की स्थापना की जानी चाहिये। उन्होंने बोर्ड के दो सदस्यों कमल फारूकी और कासिम रसूल इलियास के खिलाफ कार्रवाई की मांग की। नदवी का आरोप है कि उनके निष्कासन में दोनों सदस्यों हाथ रहा है।

उन्होंने कहा कि इसकी शुरुआत आर्ट ऑफ़ लिविंग के संस्थापक श्री श्री रवि शंकर से मुलाकात के बाद शुरू हुई थी। उन्होंने बोर्ड की बैठक में बाबरी मस्जिद-राम जन्मभूमि विवाद के एक सौहार्दपूर्ण समझौते के बारे में बात की थी। उन्होंने कहा कि दोनों समुदायों के बीच माहौल अच्छा होना चाहिए। शरियत में इसके लिए अनुमति है। हनबली स्कूल ऑफ इस्लामिक के अनुसार, एक मस्जिद को स्थानांतरित किया जा सकता है। उन्होंने एक मस्जिद हमेशा एक मस्जिद बनी रहेगी इस पर कोई समझौता नहीं होगा के बयान पर कहा कि ऐसा कोई नियम नहीं है।

उन्होंने कहा कि हमें अपने मस्जिद को संरक्षण देना चाहिये। संरक्षण का मतलब यह नहीं है कि हम उसी जगह के लिये लड़ेंगे और इसे ले लेंगे। हम मस्जिद में बदलाव कर सकते हैं। एक भव्य मस्जिद का निर्माण किया जा सकता है। नदवी ने अन्य मुस्लिम नेताओं के साथ अयोध्या विवाद हल करने के लिये आध्यात्मिक गुरु रवि शंकर के साथ गत आठ फरवरी को एक बैठक की थी। गौरतलब है कि बाबरी मस्जिद/राम जन्मभूमि मामले की सुनवाई उच्चतम न्यायालय में शुरू हो गयी है।

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