पटना। बिहार और उत्तर प्रदेश में लोकसभा और विधानसभा सीटों के लिए उपचुनाव की घोषणा कर दी गई है। यहां पर चुनाव 11 मार्च को होगा और मतों की गणना 14 मार्च को होगी। इसके लिए 13 फरवरी को नामांकन की प्रक्रिया शुरू हो जाएगी। 20 फरवरी तक नाम वापस लिये जा सकेंगे।

चुनाव की घोषणा होने के साथ ही यहां पर सिसाय़त तेज हो गई है। बता दें कि राजद सांस्द तस्लीमुद्दीन के निधन के बाद अररिया लोकसभा सीट खाली हो गई थी। वहीं बिहार के ही जहानाबाद के राजद विधायक मुंद्रिका सिंह यादव और भभुवा के विधायक आनंद भूषण की मौत के बाद ये दोनों सीटें भी खाली हो गई थी। लोकसभा की एक और विधानसभा की दो सीटों के लिए होने वाले उपचुनाव में सत्तापक्ष के इकबाल की अग्निपरीक्षा तय है।

पिछले चुनाव में तीनों सीटों में से दो पर राजद का कब्जा था और एक पर भाजपा का। तीनों सीटें राज्य और केंद्र की सत्ताधारी दल भाजपा और जदयू के साथ ही लोजपा, रालोसपा और हम के लिए प्रतिष्ठा का विषय बनी हुई हैं, जबकि विपक्ष इन सीटों को हथिया कर सत्ता पक्ष का भ्रम तोडऩे के मूड में है।

चुनाव की घोषणा के साथ ही बिहार की सियासत में सरगर्मी बढ़ गई है। हाल ही में चारा घोटाले में सीबीआई द्वारा राजद अध्यक्ष लालू प्रसाद यादव को सजा सुनाए जाने के बाद वहां पर राजनीतिक समीकरण तेज हो गई है। खबर है कि लालू प्रसाद यादव ने उपचुनाव की घोषणा होने के बाद चुनाव लड़ने का संकेत दे दिया है।

वहीं यूपी के फुलपुर और गोरखपुर सीट के लिए भी चुनाव की घोषणा की गई है। गोरखपुर से सांसद योगी आदित्यनाथ के उत्तर प्रदेश का मुख्यमंत्री बनने और फूलपुर के सांसद केशव प्रसाद मौर्य के उप मुख्यमंत्री बनने के बाद यह सीटें (गोरखपुर व फूलपुर) रिक्त हो गईं और इन पर चुनाव की जरूरत पड़ी।

गौरतलब है कि हाल के दिनों में हुए चुनावों में कांग्रेस को भी कई राज्यों के वोट प्रतिशत में बढ़ोतरी हुई है। इस लिहाज से बिहार और यूपी के राजनीतिक समीकरण इस बार काफी बदल सकते हैं। बिहार में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार जोकि जदयू के राष्ट्रीय अध्य़क्ष भी हैं ने राजद और कांग्रेस के महागठबंधन की सरकार से अलग होकर भाजपा के साथ एनडीए गठबंधन में शामिल हुए और अभी बिहार में नीतीश कुमार के नेतृत्व में एनडीए की सरकार है।

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