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नई दिल्ली। बिहार में एक पत्रकार ने भूमि आवंटन को लेकर एक खबर चलाई थी। नाराज पूर्व विधायक ने पत्रकार के खिलाफ मानहानि का मामला ठोक दिया। पटना हाईकोर्ट ने पूर्व विधायक के मामले को रद्द कर दिया। गुस्साए पूर्व विधायक सुप्रीम कोर्ट चले गए लेकिन यहां भी उनकी याचिका को खारिज कर दिया गया। सुप्रीम कोर्ट ने टिप्पणी की है कि रिपोर्टिंग में यदि कोई गलती हो भी गई है तो उसे पकड़कर नहीं रखा जा सकता। वैसे भी मामला 10 साल पुराना हो गया है।

सुप्रीम कोर्ट ने नेताओं को नसीहत दी है कि पत्रकारों को अभिव्यक्ति की आजादी की अनुमति दी जानी चाहिए। चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा ने कहा कि रिपोर्टिंग में कुछ गलती हो सकती है, लेकिन इसे हमेशा के लिए पकड़कर नहीं रखा जा सकता। सुप्रीम कोर्ट ने इसके साथ ही बिहार की एक पूर्व विधायक की याचिका को खारिज कर दिया। सुप्रीम कोर्ट ने ये टिप्पणी बिहार की एक पूर्व विधायक की याचिका पर की, जिसमें पटना हाईकोर्ट के फैसले को चुनौती दी गई थी। दरअसल पटना हाईकोर्ट ने पिछले साल सितंबर में एक हिंदी चैनल के खिलाफ मानहानि के मामले को रद्द कर दिया था।

याचिकाकर्ता का कहना था कि चैनल ने अवैध तरीके से भूमि आवंटन की खबर दिखाई थी जो कि गलत था और इसलिए चैनल पर आपराधिक मानहानि का मामला फिर से चलना चाहिए। लेकिन चीफ जस्टिस ने कहा कि अभिव्यक्ति की आजादी दी जानी चाहिए। हो सकता है कि रिपोर्टिंग में कुछ गलत हो, लेकिन इसे हमेशा के लिए पकड़े नहीं रखा जा सकता। वैसे भी मामला 10 साल पुराना है।

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