देवरिया। “बनकटा ब्लॉक के बरमापाली गांव निवासी अनीता देवी पत्नी शैलेंद्र गोंड की पत्नी को प्रसव कराने के लिए परिजन सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र भाटपाररानी ले गए। वहां के डाक्टरों ने अस्पताल में कोई सुविधा न होने की बात कह जिला महिला चिकित्सालय के लिए रेफर कर दिया। गरीबी से लाचार महिला को अस्पताल से एम्बुलेंस की भी सुविधा नहीं दी गई और उसे परिजन ट्रेन से जिला महिला चिकित्सालय देवरिया ले गए। वहां पर पर्ची बनाकर महिला को डॉक्टर से परिजनों ने दिखाया।

महिला चिकित्सक ने प्रसूता की बिना जांच के यह कहकर वापस कर दिया कि अभी घर ले जाओ बच्चा पैदा होने में चार दिन से अधिक का समय है। महिला प्रसव पीड़ा से जिला अस्पताल में ही कराह रही थी, लेकिन डाक्टरों ने उस पर थोड़ी भी रहम नहीं की और उसे अस्पताल से बाहर कर दिया। परिजन उसे बस से घर ले जा रहे थे कि खुखुंदू से ही महिला बस में दर्द से तेज चिल्लाने लगी। सलेमपुर बस स्टेशन पर असहनीय दर्द शुरू हुआ और बस से उतरते ही बीच सड़क पर उसने एक बच्चे को जन्म दे दिया। सड़क पर कुछ महिलाएं थी जो महिला की बेबसी देख अपना साल से पर्दा की। बीच सड़क बच्चा पैदा होने की खबर पर काफी लोग वहां जुट गए।

लोगों ने जच्चा-बच्चा को अस्पताल ले जाने की सलाह दी। इसके बाद परिजन उसे रिक्शा पर बैठाकर अस्पताल ले गए। अस्पताल जाते समय रास्ते में बच्चे ने दम तोड़ दिया। बच्चे के दम तोड़ने की खबर पर प्रसूता महिला जोर-जोर से चिल्लाने लगी और अपनी गरीबी की बात कह मृत बच्चे को निहार रही थी। इसी दौरान वह सदमे में आ गई और उसकी हालत गंभीर हो गई। सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र सलेमपुर में उसका इलाज चल रहा है। महिला का इसके पहले बेटी है। इस बार बेटा पैदा होने के बाद मौत होने का उसे ज्यादा सदमा लगा है। इस संबंध में सीएचसी प्रभारी डा.सुरेंद्र ने कहा कि महिला ठीक है उसका इलाज चल रहा है।”

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