• राज्य सरकार के प्रयास से 4000 चिकित्सक विभाग को मिले-श्री सिद्धार्थ नाथ सिंह

लखनऊ। प्रदेश के चिकित्सा एवं स्वास्थ्य मंत्री सिद्धार्थ नाथ सिंह ने कहा कि विभाग में डाक्टरों की नियुक्ति प्रक्रिया में तेजी लाई जाय, ताकि सरकारी अस्पतालों में चिकित्सकों की उपलब्धता सुनिश्चित हो सके। उन्होंने चिकित्सकों की नियुक्ति को त्वरित गति देने के लिए सचिव चिकित्सा एवं स्वास्थ्य श्रीमती वी हेकाली झिमोमी की अध्यक्षता में एक समिति गठित करने के निर्देश भी दिए। उन्होंने कहा कि समिति डाक्टरों की नियुक्ति से संबंधित सभी कानूनी पहलुओं पर विचार कर शीघ्र अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत करे।

श्री सिंह सोमवार को विकास भवन में उच्च स्तरीय बैठक कर रहे थे। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार सुदूर ग्रामीण ग्रामीण अंचलों में निवास करने वाले लोगों को त्वरित एवं बेहतर चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने के लिए प्रतिबद्ध है। सरकार चाहती है कि निर्धन, गरीब एवं असहायों को निर्बाध रूप से चिकित्सा सुविधा का लाभ मिले। इसके लिए रेडियोलाॅजिस्ट, पैथालाजिस्ट, स्टाफ नर्स तथा आयुष चिकित्सकों को ब्रिज कोर्स के जरिये स्पेशलाइजेशन देने पर विचार किया जा सकता है।

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उन्होंने कहा कि अस्पतालों में तैनात रोडियोलाॅजिस्ट एवं पैथालाजिस्ट को स्पेशल कोर्से के जरिए अपग्रेड किया जाये। इसी तरह महिला चिकित्सकों की कमी को देखते हुए स्टाफ नर्सों के कौशल को भी बढ़ाने पर जोर दिया जाय। स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि 2800 आयुष चिकित्सकों की सेवाएं भी प्राथमिक या सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र एवं जिला चिकित्सालयों में लेने का निर्णय लिया गया है। उन्होंने इन चिकित्सकों को भी स्पेशलाइजेशन प्रदान करने के निर्देश दिए। स्वास्थ्य मंत्री ने अति संवेदनशील 32 जनपदों में एनेस्थीसिया, स्त्री-रोग विशेषज्ञ तथा बाल-रोग विशेषज्ञ के रिक्त पदों को बिडिंग मॉडल के माध्यम से भरे जाने की कार्यवाही में तेजी लाने के भी निर्देश दिए।

उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश सरकार ने राज्य में स्वास्थ्य सेवाओं को अधिक बेहतर एवम् सुलभ रूप प्रदान करने हेतु 400 से अधिक एनेस्थीसिया, स्त्री-रोग विशेषज्ञ तथा बाल-रोग विशेषज्ञ के रिक्त पदों को खुले बाजार में प्रचलित बिडिंग मॉडल व्यवस्था के माध्यम से भरे जाने का निर्णय लिया है। इसके लिए विगत 25 अक्टूबर को आदेश भी जारी किया जा चुका है। इसके तहत निजी क्षेत्र के विशेषज्ञों की सेवाएं लेने हेतु एक वर्ष के लिए अनुबंध किया जा रहा है। इस व्यवस्था का उद्देश्य प्रदेशवासियों को जिला अस्पताल, उप-जिला अस्पताल, सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र एवम् मुख्यतः फर्स्ट रिफरेल इकाई पर समस्त आवश्यक स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराना है।

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श्री सिंह ने कहा कि सरकारी चिकित्सालयों में 7500 चिकित्सकों की कमी थी। इसको पूरा करने के लिए चिकित्सकों की सेवानिवृत्ति की उम्र 60 वर्ष से बढ़ाकर 62 वर्ष कर दी गई है। राज्य सरकार के प्रयास से लोक सेवा आयोग द्वारा 2065 चयनित चिकित्सकों की सूची जारी की चुकी है और 1700 डाॅक्टर विभाग को मिल चुके हैं। उन्होंने अन्य शेष चिकित्सकों के नियुक्ति की कार्यवाही शीघ्र पूरी करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि सरकार ने विभाग में 1000 चिकित्सकों के पदों को वाॅक-इन इण्टरव्यू के माध्यम से अनुबंध के आधार पर भरे जाने का निर्णय लिया है। अब तक 300 से अधिक चिकित्सक साक्षात्कार पूर्ण कर अस्पतालों में तैनात भी हो चुके हैं।

सेवानिवृत्त हो चुके चिकित्सकों को पुर्निनियुक्ति के माध्यम से सेवा में लेने की कार्यवाही चल रही है। इसके तहत 106 से अधिक चिकित्सक कार्यभार भी ग्रहण कर चुके हैं। इस प्रकार अब तक करीब 4000 चिकित्सक विभाग को मिल चुके हैं। उन्होंने अन्य शेष रिक्त पदों को शीघ्र भरने के निर्देश दिए। इस व्यवस्था के माध्यम से प्रदेश की जनता को शीघ्र एवं सुलभ स्वास्थ्य सेवाओं का लाभ समय से एवं उचित स्थान पर उपलब्ध होगा। इस प्रयास से मातृ एवं शिशु मृत्यु दर में भी भारी कमी आयेगी। उन्होंने बताया कि मौजूदा सरकार स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर, गुणवत्तापूर्ण बनाने तथा समाज के प्रत्येक वर्ग एवं व्यक्ति तक पहुँचाने हेतु पूरी तरह सजग है।

स्वास्थ्य मंत्री ने का कि 595 दंत रोग विशेषज्ञों की नियुक्ति के लिए लोक सेवा आयोग को अधियाचन भेजा जा चुका है। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए इन चिकित्सकों की नियुक्ति के लिए तेजी से प्रयास किया जाय। इसके अलावा उन्होंने यह भी कहा कि बी0डी0एस0 चिकित्सकों को संविदा पर लेने के प्रपोजल प्रस्तुत किया जाय। बैठक में प्रमुख सचिव, चिकित्सा एवं स्वास्थ्य प्रशांत त्रिवेदी, सचिव वी हेकाली झिमोमी, महानिदेशक डा पद्माकर सहित वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।