अमन वर्मा, कौड़ीराम, बांसगांव। पीड़ित परिवार न्याय के लिए 8 सितंबर से लगा हुआ है लेकिन आज तक उसे न्याय नहीं मिला है। परिवार न्याय के लिए दर-दर आंसू बहा रहा है। दिनदहाड़े हुई इस जघन्य हत्या की चर्चा तो वैसे पूरे प्रदेश में चल रही है लेकिन सूबे में योगी और केंद्र में मोदी सरकार में इस तरह की वारदात सवाल खड़े करती है। गोरखपुर की जनता व पीड़ित परिवार के दिमाग में एक ही सवाल बार-बार उपज रहा है कि एक कोतवाली बांसगांव के पूर्व थाना अध्यक्ष प्रमोद कुमार त्रिपाठी को बचाने में केंद्र सरकार व राज्य सरकार व जिले के कप्तान साहब यह लोग आखिर मजबूर क्यों हो गए हैं।

पीड़ित परिवार को थाना अध्यक्ष संतोष सिंह द्वारा को चार बार थाने से डांट कर भगा देना आखिर केंद्र सरकार व राज्य सरकार व जिले के कप्तान साहब क्या साबित करना चाहते हैं? यह आरोप है जनता व पीड़ित परिवार का। जबकि मृतक की बहन नीरज देवी वह मृतक के पिता राम सूरत यादव का साफ तौर पर कहना है कि हत्या कांड का सारा सबूत अभी सबके सामने साफ़ दिखाई दे रहा है?

 थाना अध्यक्ष संतोष सिंह से बात करने पर उन्होंने बताया कि सरकारी नियमानुसार नहीं मैं व्यक्तिगत रूप से जांच व पता कर रहा हूं। कुछ अगर ऐसा मिला तो मैं कार्रवाई करूंगा? कोतवाली बांसगांव पूर्व थाना अध्यक्ष प्रमोद कुमार त्रिपाठी का बड़ा खेल पीड़ित परिवार को पोस्टमार्टम रिपोर्ट उल्टा बताकर गुमराह किया जिसका खामियाजा आजतक पीड़ित परिवार भुगतने पर हो गया है मजबूर।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के गृह जनपद गोरखपुर में मृतिका की बहन नीरज देवी व बूढ़ा पिता रामसूरत यादव न्याय के लिए दर-दर बहा रहे हैं आंसू। पीड़ित परिवार का आरोप है कि गिरफ्तारी तो दूर की बात हो गई आज तक पुलिस हम पीड़ित का लिखित तहरीर तक थाने में नहीं ली। जिससे परिवार और यहां की जनता में भारी आक्रोश उत्पन्न हो रहा है।

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