लखनऊ। फिल्म पद्मावती के निर्देशक और निर्माता संजय लीला भंसाली के खिलाफ लखनऊ सीजेएम कोर्ट में फौजदारी का परिवाद दाखिल हुआ है। आरोप है कि बिना सेंसर बोर्ड के पास किये कुछ लोगों को फिल्म दिखायी गयी है। यह कानूनन अपराध है। परिवाद दाखिल के वादी पक्ष ने बताया कि इस फ़िल्म में चित्तौड़ की प्रसिद्द राजपूत रानी पद्मिनी का वर्णन किया गया है जो रावल रतन सिंह की पत्नी थीं।

यह फ़िल्म दिल्ली सल्तनत के तुर्की शासक अलाउद्दीन खिलजी का 1303 ई में चित्तौड़गढ़ के दुर्ग पर आक्रमण को भी दर्शाती है। पद्मावत के अनुसार चित्तौड़ पर अलाउद्दीन के आक्रमण का कारण रानी पद्मिनी के अनुपन सौन्दर्य के प्रति उसका आकर्षण था। अन्ततः 28 जनवरी 1303 ई को सुल्तान चित्तौड़ के क़िले पर अधिकार करने में सफल हुआ। राणा रतन सिंह युद्ध में शहीद हुये और उनकी पत्नी रानी पद्मिनी ने अन्य स्त्रियों के साथ आत्म-सम्मान और गौरव को मृत्यु से ऊपर रखते हुए जौहर कर लिया।

लेकिन इतिहास के जानकारों का कहना है कि भंसाली ने रानी के जौहर को जिस प्रकार दिखाना चाहिये था वो नहीं दिखाया और इतिहास के साथ खिलवाड़ किया है। फिल्म के निर्माता और निर्देशक के खिलाफ लखनऊ कोर्ट में फौजदारी का परिवाद दाखिल हुआ है।

गौरतलब है कि संजय लीला भंसाली ऐतिहासिक फिल्म बनाने के लिए जाने जाते हैं। पद्मावती फिल्म बनाने से पहले उन्होंने रामलीला, बाजीराव मस्तानी जैसी फिल्मों का निर्देशन किया है। उनके द्वारा बनायी गई इन फिल्मों को जनता से काफी तारीफ मिली। लेकिन पद्मावती फिल्म का ट्रेलर रीलिज करते ही उनके ऊपर इतिहास से छेड़छाड़ करने का गंभीर आरोप लगा है।