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विजय त्रिपाठी, लखनऊ। एनजीटी की सख्ती का असर अब यूपी में भी दिखने लगा है। पिछले दिनों में स्मॉग के कारण प्रदूषण जांच रिपोर्ट में राजधानी टॉप पर रही है। अभी भी यहां एयर पोल्यूशन दूसरे शहरों की अपेक्षा काफी अधिक है। बढ़ते वायु प्रदूषण के प्रभाव को कम करने के लिए जिलाधिकारी कौशल राज शर्मा ने निर्देश दिए हैं। शहर के किसी भी क्षेत्र, गली, महल्ले में कूड़ा न जलाया जाए।”

सफाईकर्मियों अथवा पब्लिक द्वारा सफाई के उपरांत कूड़े के ढेर बना दिए जाते हैं। जिसमें आग लगने की संभावना बनी रहती है। उन्होंने कहा नियमित रूप से कूड़े को न जलाए जाने के संबंध में जागरूकता पैदा करने के निर्देश दिया गया है। कूड़ा जलाते हुए पाये जाने पर जुर्माना वसूल करने की कार्रवाई की जाएगी। इसके बाद भी कूड़ा जलाते हुए पाये जाने पर उसके विरुद्ध एफआईआर भी दर्ज करायी जाएगी। सड़क के किनारे एकत्रित मलवा एवं निर्माण सामग्री के हटाए जाने एवं जुर्माना वसूल किए जाने के संबंध में कार्रवाई की रिपोर्ट मांगी गई है।

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यदि किसी भी क्षेत्र में मलबा अथवा निर्माण सामग्री सड़क के किनारे अवैध रूप से पायी जाती है तो इसके लिए नगर अभियंता उत्तरदायी होंगे। डीएम की ओर से कई विभागों को पत्र भेज कर सहयोग मांगा गया है। इसमें एलडीए, आवास-विकास परिषद, व सिंचाई विभाग हैं। निर्माण कार्य के दौरान वातावरण प्रदूषित न होने के संबंध में एलडीए एवं आवास विकास परिषद से कहा गया है। विभाग अपने स्तर से समस्त ठेकेदार व डेवेलपर्स को निर्देश जारी करें कि निर्माण सामग्री को सड़क पर न रखकर अपने कैम्पस के भीतर ही रखें।

मिट्टी की लेवलिंग एवं ड्रेसिंग का कार्य कुछ समय के लिए स्थगित कर दिया जाए। कार्य स्थल व योजनाओं में सड़कों पर पानी का छिड़काव करवाने के लिए भी कहा गया है। सिंचाई विभाग ने गोमती रिवर फ्रंट के निर्माण में खुदाई से निकली मिट्टी को विभाग ने कई स्थान पर सड़क के किनारे एकत्र किया है। मिट्टी हटाये जाने एवं ऐसे समस्त कार्य जिसमें धूल अत्यधिक मात्रा में होता है, को रोके जाने के संबंध में अधिशासी अभियंता, सिंचाई विभाग भी पत्र भेजा गया है। कुछ क्षेत्रों में प्राइवेट एवं नगर निगम के सफाई कर्मी सफाई के बाद एकत्र कूड़े को नाले में डाल देते हैं। इस पर उन्होंने कहा- “ऐसे सफाईकर्मियों के खिलाफ विभागीय कार्रवाई की जाए। अगर उसके बाद भी आदत में सुधार न हो तो एफआईआर कराई जाए। इसके बाद भी इस पर रोक न लगने पर संबंधित क्षेत्र के सुपरवाइजर एवं सफाई निरीक्षक पर कार्रवाई की जाए।

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शहरी वातावरण में बढ़ते प्रदूषण को रोकने के लिए निर्माण स्थलों पर डीजल जनरेटरों का प्रयोग न करने के लिए भी कहा गया है। मिट्टी खुदाई के बाद पानी का छिड़काव करने के निर्देश दिए गए हैं। यहीं नहीं ऐसे स्थानों पर राष्ट्रीय हरित न्यायाधिकरण के आदेशों के बाद लखनऊ विकास प्राधिकरण ने सभी ठेकेदारों को इस संबंध में कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। नगर आयुक्त की ओर से जारी पत्र में सड़क किनारे गाड़ी खड़ी करने पर नगर निगम के कर्मचारियों और पुलिस विभाग को सतर्क रहने को कहा गया है।

पत्र में कहा गया है कि राज ढाणी के 129 प्रदूषण केन्द्रों की जांच कर ये देखा जाय कि वह सही प्रमाण-पत्र जारी कर रहे हैं एवं सभी सरकारी वाहनों के प्रदूषण प्रमाण-पत्र जल्द से जल्द प्राप्त कर लिए जाय। इसके साथ ही आम जनता को भी प्रदूषण प्रमाण-पत्र लेकर चलना चाहिए।  इस बात की निगरानी रखनी होगी कि सड़क पटरी पर कोई भी व्यक्ति गाड़ी न खड़ी कर सकें। इससे व्यस्त समय में अनावश्यक जाम की स्थिति बनती है। जाम लगने से एक साथ एक ही जगह सैकड़ों गाड़ियों का धुंआ निकलता है जिससे एयर पोल्यूशन की स्थिति बन जाती है। ऐसे में सड़क किनारे गाड़ी खड़ी करने पर अब पुलिस सख्त कार्रवाई कर सकती है।

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