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इस पटाखे की दुकान पर कोई पाबंदी नहीं ! 

यहां से खरीदें..

जी हां ! सुप्रीमकोर्ट के पटाखों के बैन का असर यहां नहीं है। देश की राजधानी दिल्ली के बीचों-बीच सेन्ट्रल पार्क में हुल्लड़ों की एक जमात ‘पटाखों की सेल कर रही है। वह भी बिल्कुल मुफ्त में। गजब की सेल लगी है। कोई भी बंदा अपनी बंदी के साथ जाये और पटाखा मुफ्त ले आये।

शर्त यही है कि ‘पटाखा’ लेने के बाद आपके ठहाके 500 मीटर की दूरी तक गूंजनी चाहिए। दिल्ली के दिल कनाॅट प्लेस के केन्द्रीय पार्क में लगी इस ‘पटाखे’ की दुकान पर ग्राहकों की जबर्दश्त भीड़ है। सुबह 10 बजे से लेकर 11 बजे तक ग्राहकों की लम्बी लाइन लगी रहती है। इस लाइन में मंत्री और संतरी देखे जा सकते हैं।

जमुना लाल हलवाई से लेकर राकेश गुप्ता तक पंक्तिबद्ध हैं। पीआर एजेंसी में काम करने वाले अनुज पोखरियाल से लेकर दिल्ली घूमने आये डंडियाल तक लाइन में लगे हैं। भीड़ का आलम यह है कि पुलिस को भारी मशक्कत करनी पड़ रही है।

लोग खाली हाथ जा रहे हैं और झोली भर-भर के ला रहे हैं। मजे की बात यह है कि ये पटाखे पूरी तरह हस्तनिर्मित हैं और इससे प्रदूषण बिल्कुल भी नहीं फैलता। मैं भी इस लोलुपता में लग गया लाइन में कि ‘मुफ्त का चन्दन दे रघुनन्दन’ होने में हर्ज ही क्या है। सो लग गया लाइन में। मगर जो पटाखा मिला वह ठहाके के लिए काफी था।

मुफ्त मिले माल को जब खोलकर देखा तो एक सादे कागज पर लिखा था-

ये पटाखा है, पूरी तरह से प्रदूषण मुक्त… 

(यह एक व्यंग है, इसका वास्तविकता से कोई संबंध नहीं है)

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