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पत्रकार अथवा मीडिया संस्थान पर किया गया हमला होगा अब गैर जमानती अपराध। पुलिस उपाधीक्षक या उससे ऊपर के रैंक के अधिकारी ही होगें जांच अधिकारी।

नई दिल्ली। पत्रकारों पर हो रहे हमलों के खिलाफ उठ रही आवाज को आखिरकार न्याय मिल ही गया। पत्रकार सुरक्षा कानून की मांग को फिलहाल अभी एक ही राज्य महाराष्ट्र ने हरी झण्डी दी है, लेकिन जल्द ही देशभर में चौथे स्तंभ के प्रहरी यानि पत्रकारों पर हमला करने वालो के खिलाफ कानून बनेगा। देशभर में उठ रही मांग पर महाराष्ट्र सरकार द्वारा विधेयक पास कराये जाने से महाराष्ट्र राज्य पहला राज्य बन गया है।

पत्रकारों के हित में सबसे पहले कदम उठाने पर आईरा सहित तमाम पत्रकार संघों ने पत्रकार सुरक्षा कानून बनाए जाने को पत्रकारों की जीत बताते हुए महाराष्ट्र सरकार, उसके मंत्रिमंडल के सदस्य, विधानसभा के समस्त सदस्यों का आभार व्यक्त किया है। देश के पत्रकार संगठनों ने पत्रकार सुरक्षा कानून बनाए जाने को पत्रकार सुरक्षा के लिए मील का पत्थर बताया है। स्थानीय पत्रकारों ने भी महाराष्ट्र सरकार को इस एतिहासिक कदम के लिए धन्यवाद दिया है।

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पत्रकारों पर हमला करने वालो की अब खैर नहीं

राज्य सरकार के इस फैसले के बाद मीडियाकर्मी पर हमला करना गैर-जमानती होगा। विधेयक को बजट सत्र के अंतिम दिन बिना किसी चर्चा के दोनों सदनों में मंजूर कर लिया गया। विधेयक में इस कानून का दुरुपयोग करने वालों के खिलाफ भी कार्रवाई का प्रावधान किया गया है। विधेयक के मुताबिक, हमला करने वाले को तीन साल की सजा अथवा 50,000 रुपये का जुर्माना लगाया जा सकता है। हमले में हुए नुकसान या फिर पत्रकारों के इलाज का खर्च भी हमलावर से वूसल किया जाएगा। साथ ही कानून में प्रावधान किया गया है कि अगर पत्रकार इसका दुरुपयोग करता है तो उसपर भी कार्रवाई होगी।

यह कानून ड्यूटी पर मौजूद पत्रकारों पर किसी तरह की हिंसा करने, पत्रकार अथवा मीडिया संस्थान की संपत्तियों को नुकसान पहुंचाने पर यह कानून लागू होगा। इसके तहत दोषी को 3 साल की सजा और 50 हजार रुपए का जुर्माना अथवा दोनों का प्रावधान किया गया है। पत्रकारों मीडिया संस्थानों के साथ स्थायी तौर पर और कांट्रैक्ट पर काम करने वाले पत्रकारों पर हमला करना गैरजमानती अपराध माना जाएगा।

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हमला करने वाले को पीड़ित के इलाज का खर्च और मुआवजा भी अदा करना होगा। मेडिकल खर्च व मुआवजा न देने की सूरत में इस रकम को भूमि राजस्व बकाया मान कर वसूल किया जाएगा। इस तरह के मामलों की जांच पुलिस उपाधीक्षक और उसके ऊपर स्तर का अधिकारी जांच करेगा।

1 COMMENT

  1. जांच मे देरी हो रही है।हमे मिल के आवाज उठानी चाहिए

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