सरकार और प्रशासन की उपेक्षा से दम तोड़ रहे हैं राष्ट्रीय खिलाडी के सपने

राकेश रावत
गाजियाबाद। मंजिल उन्हीं को मिलती है, जिनके सपनों में जान होती है, पंख से कुछ नहीं होता, हौसलों से उड़ान होती है। जी हां, हम बात कर रहे हैं एक ऐसी नेशनल प्लेयर की जो पहले कबड्डी में देश का प्रतिनिधित्व कर चुकी है लेकिन सरकारी उपेक्षा और खेल के प्रति उदासीन रवैये से उनको यह खेल छोडऩा पड़ा अब वह पर्वतारोहण के क्षेत्र में आ चुकी हैं और 16000 फीट की दो चोटियों पर तिरंगा भी फहरा चुकी है। अब उनका सपना दक्षिण अफ्रीका की सबसे ऊंची चोटी किलिमंजारो पर देश का तिरंगा फहराने की है। इसकी ऊंचाई 18500 फीट के करीब है लेकिन समय परिस्थिति और गरीबी के चलते उनको अपना सपना सच होता नहीं दिख रहा है। इस पर्वतारोही का नाम है रीतू कुमार, जो गाजियाबाद के मुरादनगर क्षेत्र के पैंगा गांव की रहने वाली हैं। बचपन में ही मां का साया सिर से उठ जाने के बाद वर्ष 2013 में पिता की भी कैंसर से मौत हो गई थी। जिसके बाद वह अनाथ हो गई। दो भाइयों के होने के बावजूद उनका एकाकी जीवन जीना और देश के लिए जीने का सपना देखने वाली रीतू मदद के लिए राज्य और केंद्र सरकार से आस लगाए बैठी है कि सरकार आगे आकर दक्षिण अफ्रीका में अगले महीने होने वाली पर्वतारोही अभियान में उनको देश का प्रतिनिधित्व करने का अवसर प्रदान करें और वह सबसे ऊंची चोटी पर तिरंगा फैलाकर देश का मान बढ़ा सकें। उन्होंने 2017 में बीसी राय पीक जिसकी ऊंचाई 16000 फीट है तथा सिक्किम की सबसे ऊंची चोटी पर भी तिरंगा फहराया है। अब उनका सपना दक्षिण अफ्रीका की धरती पर भारत देश का मान बढ़ाने का है लेकिन गरीबी, मजबूरी, उदासीनता और सरकारी उपेक्षाओं के चलते रीतू खुद को असमर्थ पाती है। रीतू के सपने बहुत ऊंचे हैं और उसका हौसला भी आसमान की बुलंदियों पर है, बस अब उसको जरूरत है छोटी सी मदद की। जब सरकार या फिर कोई समाज सेवी संस्था आगे बढ़े और उसके सपनों को आगे की उड़ान भरने का अवसर प्रदान करें।