विवाहिता की हत्या में पति, जेठ व भतीजा दोषी

अमर भारती संवाददाता
गाजियाबाद। तलाक का विवाद सुलझाने के नाम पर पत्नी को बस स्टैंड पर बुलाकर अपहरण कर हत्या करने वाले पति, जेठ व भतीजे को 16 साल बाद अदालत ने दोषी करार दिया है। सुनवाई के दौरान एक आरोपी मृतका के पति के दोस्त की कोई भूमिका नहीं मिली उसे अदालत ने बरी कर दिया। सजा के प्रश्न पर अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश पवन कुमार शर्मा की अदालत में आज (बुधवार) सुनवाई होगी।
जिला शासकीय अधिवक्ता राजेश चंद्र शर्मा व सहायक जिला शासकीय अधिवक्ता रवि शर्मा ने बताया कि मसूरी थाना क्षेत्र के नारायणपुर धौलाना निवासी लोकेंद्र शर्मा ने अपनी बहन बबीता की शादी 1998 में शाहदरा के रोहताश नगर निवासी विकास के साथ की थी। घरेलू बातों पर आए दिन दोनों में विवाद होने की वजह से दोनों के रिश्ते खराब हो गए थे। इस कारण से बबीता मायके में भाई लोकेंद्र के साथ रह रही थी। कड़कडड़ूमा कोर्ट में दोनों का तलाक का मुकदमा चल रहा था। शादी के आठ साल बाद विकास ने 25 मार्च 2006 को लोकेंद्र से बात कर फैसले के लिए अगले दिन 26 मार्च को मसूरी बस स्टैंड पर बुलाया था। बबीता और उसका भाई लोकेंद्र 26 को मसूरी बस स्टैंड पर पहुंच गए थे। वहां पहले से ही विकास, मुकेश, मोनू और देवेंद्र गाड़ी में मौजूद थे। बबीता को जबरन गाड़ी में बिठा लिया और वहां से फरार हो गए। बाद में बबीता का शव सिहानी गेट थाना क्षेत्र के अटौर नगला में मिला। इसकी रिपोर्ट बबीता के भाई लोकेंद्र ने थाने में दर्ज कराई थी। रिपोर्ट के आधार पर आरोपियों से पूछताछ की तब पता चला कि विकास, उसके बड़े भाई मुकेश और भतीजे मोनू ने बबीता की गोली मारकर हत्या कर दी। जांच में विकास के दोस्त देवेंद्र की कोई भूमिका नहीं मिली तो उसे अदालत ने बरी कर दिया। इस मामले में कुल 19 गवाह पेश किए गए थे।