मैक्स अस्पताल ने गाजियाबाद क्षेत्र के सबसे बड़े इमरजेंसी रूम सेटअप को फिर से किया लॉन्च

• दिल से जुड़े इमरजेंसी केसों के लिए होगा हार्ट कमांड सेंटर
• हार्ट से जुड़ी बीमारियों से होने वाली मौत के आंकड़ों में आएगी कमी

29 सितंबर 2022, गाजियाबाद: दिल्ली-एनसीआर और उत्तर प्रदेश में प्रमुख स्वास्थ्य सेवा उपलब्ध करवाने वालों में से एक मैक्स सुपर स्पेशियलिटी हॉस्पिटल, वैशाली ने आज अपने नए इमरजेंसी रूम सेटअप को लॉन्च करने का ऐलान किया। ये हॉस्पिटल पश्चिमी उत्तर प्रदेश और दिल्ली एनसीआर में सबसे बड़े सुपर स्पेशियलिटी हॉस्पिटल में से है।

जहां मैक्स हॉस्पिटल वैशाली, के इस नए इमरजेंसी रूम में 32 बेड की क्षमता है, जिसमें 18 इमरजेंसी रूम, 10 आइसोलेशन बेड और ट्राइएज बेड शामिल हैं। जो टियर-II और टियर-III शहरों के निवासियों की स्वास्थ्य संबंधी जरूरतों को पूरा करेगा। वहीं हाईवे से हॉस्पिटल की कम दूरी को देखते हुए नया बनाया गया जिसमें ईआर सेटअप तुरंत देखभाल के साथ ट्रॉमा केसों को भी जल्द देख सकेगा और कई लोगों की जान बचा पाएगा।

आपको बता दें की वर्ल्ड हार्ट डे से पहले, अस्पताल ने ईआर सेटअप में एक विशेष हार्ट कमांड सेंटर भी लॉन्च किया, जो सख्त जरूरत वाले मरीजों को खास देखभाल प्रदान करने में खास भूमिका निभाएगा। ये हॉस्पिटल द्वारा प्रमुख सुधार में से एक है और इस खास केंद्र को शुरू करने के पीछे की वजह ये सुनिश्चित करना है कि इमरजेंसी केस में प्रभावी देखभाल प्रदान की जा सके और दिल की बीमारी की वजह से हो रही मौतों को रोका जा सके।

वहीं हार्ट कमांड सेंटर के साथ नए इमरजेंसी रूम का उद्घाटन सड़क परिवहन और राजमार्ग राज्य मंत्री, जनरल वीके सिंह, गाजियाबाद के डीएम श्री राकेश कुमार सिंह के साथ मैक्स सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल, वैशाली के सीनियर वाइस प्रेजिडेंट (ओ) और यूनिट हेड डॉ गौरव अग्रवाल और मैक्स सुपर स्पेशियलिटी में कार्डियोलॉजी के निदेशक डॉ अमित मलिक डॉ गौरव मिनोचा- निदेशक, कार्डियोलॉजी; डॉ समीर कुब्बा – निदेशक, कार्डियोलॉजी और डॉ धीरज नायर- मैक्स सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल, वैशाली में आपातकालीन विभाग के प्रमुख की मौजूदगी में किया गया जहां इनके अलावा हॉस्पिटल के कई अन्य प्रमुख लोग भी शामिल थे।

बता दें की नए इमरजेंसी रूम की लॉन्चिंग के दौरान मैक्स सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल, वैशाली के सीनियर वाइस प्रेजिडेंट (ओ) और यूनिट हेड डॉ गौरव अग्रवाल ने कहा कि किसी भी इमरजेंसी में समय एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। जहां हमारा प्रयास है कि हमारे अस्पताल में सबसे बड़े आपातकालीन सेटअप के जरिए सर्वश्रेष्ठ-इन-क्लास सेवाएं प्रदान की जाएं। इतना ही नही उन्होंने आगे कहा, लाइफस्टाइल में बदलाव दिल से जुड़ी बीमारियों से पीड़ित युवाओं की संख्या में वृद्धि के लिए सबसे महत्वपूर्ण कारकों में से एक है। जहां इस प्रकार की नई सुविधा के माध्यम से हम जनता को उनके दिल को स्वस्थ रखने के महत्व के बारे में जागरूक करना चाहते हैं।

वहीं मैक्स हॉस्पिटल के डॉक्टर ने बताया कि दिल के मरीज के लिए वक्त कितनी अहम भूमिका निभाता है जिसको लेकर उन्होंने कहा कि अगर मरीज सही समय पर नजदीकी इमरजेंसी रूम तक नहीं पहुंच पाता है तो कैसे हर गुजरते लम्हें में उसके बचने की उम्मीद कम होती चली जाती है। जहां पहले दिल की बीमारी बढ़ती उम्र के लोगों में होने वाली बीमारी मानी जाती थी लेकिन अब ऐसा नहीं है। दरअसल हाल ही में हार्ट अटैक से कई फेमस सेलिब्रिटी की मौत हुई जिसमें राजू श्रीवास्तव, पुनीत राजकुमार (46), सिद्धार्थ शुक्ला (40) और टीवी एक्टर दिपेश भान (41) शामिल हैं।

आपको बता दें की डब्ल्यूएचओ की हालिया रिपोर्टों के अनुसार, दिल से जुड़ी बीमारियां भारत में मृत्यु का प्रमुख कारण हैं और दुनियाभर में 5 पुरुष में से 1 पुरुष और 9 महिलाओं में से 1 महिला की मौत दिल की बीमारी से होती है। जहां कई अध्ययनों के मुताबिक, साल 2030 तक दुनिया में सबसे अधिक कार्डियक अरेस्ट के मामले भारत में देखने को मिलेंगे और इनमें से ज्यादातर मामले युवा और मध्यम आयु वर्ग के होंगे।

वहीं आनुवंशिक कारकों के अलावा, ज्यादातर मामलों में ऐसी बीमारियों को रोका जा सकता है। जहां इसके लिए लोगों को दिल की बीमारियो से बचने के बारे में जानकारी, स्वस्थ दिल के योग्य जीवनशैली का पालन करने और नियमित जांच कराने की जरूरत है। जिसमें मध्यम आयु वर्ग की आबादी (पुरुषों और महिलाओं दोनों) की खराब जीवनशैली की आदतें जैसे स्मोकिंग, शराब, खराब खान-पान और एक्टिव न होना समय से पहले दिल की परेशानियां होने की वजह बन रही हैं। हालांकि आनुवंशिक कारकों से होने बीमारी होने पर स्थिति को पूरी तरह से नियंत्रित नहीं किया जा सकता है, लेकिन जीवनशैली में बदलाव करके स्थिति को बेहतर किया जा सकता है। दरअसल कार्डिएक अरेस्ट के मामलों में समय एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है और इसलिए इन लक्षणों से पीड़ित किसी भी व्यक्ति को जल्द से जल्द हॉस्पिटल के ईआर तक पहुंचने की जरूरत है क्योंकि ऐसे मामलों में हर सेकंड अहम साबित हो सकता है।

जहां दिल से संबंधित इन बीमारियों से पीड़ित लोगों को कुछ मिनटों तक सीने के बीच में एक असहज दबाव, स्क्वीज़, भारीपन और दर्द का अनुभव हो सकता है. ऐसे में दिल का दौरा पड़ने जैसी अवस्था पर ध्यान रखना चाहिए. इसके अलावा एक या दोनों बांह, पीठ, गर्दन, जबड़ा या पेट में दर्द या बेचैनी, सांस फूलना या बिना सीने में तकलीफ ठंडा पसीना आना, जी मचलाना और हल्का सिर दर्द होने पर भी लोगों को अलर्ट रहना चाहिए।

Report By Krish Dalmiya