पूर्व अध्यक्ष अरविंद संगल को अदालत ने भेजा जेल

अमर भारती संवाददाता
कैराना। तत्कालीन ईओ के उत्पीडऩ तथा जातिगत टिप्पणी के मामले में गैर जमानती वारंट जारी होने के बाद पूर्व चेयरमैन एवं भाजपा नेता अरविंद संगल कोर्ट में पेश हुए। इस दौरान उनके अधिवक्ता की ओर से कोर्ट में दायर की गई जमानत अर्जी पर फैसला नहीं आ सका। इसके चलते पूर्व चेयरमैन को न्यायिक अभिरक्षा में जेल भेज दिया गया।
शामली नगरपालिका की अधिशासी अधिवक्ता ने वर्ष 2016 में अरविंद संगल पर अभद्रता, उत्पीडऩ करने व जातिसूचक शब्दों का प्रयोग करने समेत गंभीर आरोप लगाए थे। उस समय वह नगरपालिका के चेयरमैन थे, जिनके विरूद्ध एससी-एसटी एक्ट व सरकारी कार्य में बाधा डालने सहित संगीन धाराओं में अभियोग दर्ज किया गया था। यह मामला कैराना स्थित अपर जिला एवं सत्र न्यायालय (रेप एंड पॉक्सो)/एससी-एसटी कोर्ट में विचाराधीन चल रहा है। इस मामले में अरविंद संगल हाईकोर्ट से स्टे ले आए थे, लेकिन स्टे की छह माह की अवधि पूर्ण होने के पश्चात पांच दिन पूर्व कोर्ट ने उनके विरूद्ध गैर जमानती वारंट जारी कर दिया था। बुधवार को पूर्व चेयरमैन एवं वर्तमान भाजपा नेता अरविंद संगल अपने अधिवक्ता के साथ कोर्ट में पेश हुए। इस दौरान उनके अधिवक्ता की ओर से कोर्ट में जमानत अर्जी भी लगाई गई। जमानत पर बहस पूरी होने के बाद कोर्ट का फैसला नहीं आया। इसके बाद न्यायाधीश रेशमा चौधरी ने पूर्व चेयरमैन अरविंद संगल को न्यायिक अभिरक्षा में जेल भेजने का आदेश दिया। न्यायिक अभिरक्षा में जाने के दौरान पूर्व चेयरमैन से मीडिया ने बातचीत करने का प्रयास किया, लेकिन वह चुप रहे। वहीं, कोर्ट ने मुकदमे की वादी शामली नगरपालिका की तत्कालीन अधिशासी अधिकारी को भी नोटिस जारी करते हुए हाजिर होने के आदेश दिए हैं। दूसरी ओर, पूर्व चेयरमैन के अधिवक्ता ब्रह्मपाल सिंह चौहान ने बताया कि पुलिस द्वारा विवेचना के बाद केवल धारा 3/1, (द), (ड) एससी एसटी एक्ट में ही चार्ज लगाया गया है। न्यायाधीश ने कल गुरूवार की तारीख लगायी है, जिसमें जमानत अर्जी पर बहस होगी और कोर्ट का फैसला आएगा।